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नहीं रहीं सुरों की मलिका आशा भोसले : चेस्ट इंफेक्शन के बाद ली अंतिम सांस, कल शाम 4 बजे अंतिम संस्कार

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नई दिल्ली। सिंगर आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया है। रविवार दोपहर मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उन्हें शनिवार शाम को यहां भर्ती किया गया था।

ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल के डॉ. प्रतीत समदानी ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया कि आशा भोसले को कई मेडिकल समस्याएं थीं और मल्टी-ऑर्गन फेल्योर के कारण उनका निधन हुआ। डॉ. प्रतीत समदानी ने PTI को बताया कि आशा भोसले को मल्टी ऑर्गन फैल्योर हुआ, यानी उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। आशा भोसले के बेटे आनंद भोसले ने बताया कि जो लोग अंतिम दर्शन करना चाहते हैं, वे कल सुबह 11 बजे उनके घर आ सकते हैं। अंतिम संस्कार कल शाम 4 बजे शिवाजी पार्क में किया जाएगा।

आशा भोसले ने अपने करियर में 14 से अधिक भाषाओं में 12,000 से ज्यादा गाने गाए। उनके गाने ‘इन आंखों की मस्ती’, ‘दम मारो दम’, ‘पिया तू अब तो आजा’ और ‘चुरा लिया है तुमने’ आज भी सदाबहार हैं।

आशा भोसले मशहूर थिएटर एक्टर और क्लासिकल सिंगर दीनानाथ मंगेशकर की बेटी और लता मंगेशकर की छोटी बहन थीं। जब वो सिर्फ 9 साल की थीं तब उनके पिता का निधन हो गया था, जिसकी वजह से उन्होंने बहन लता मंगेशकर के साथ मिलकर परिवार को सपोर्ट करने के लिए सिंगिंग शुरू कर दी थी।

शंकर महादेवन ने आशा भोसले के निधन पर कहा, ‘यह हम सभी और भारतीय संगीत के लिए बेहद दुखद दिन है। मुझे यकीन ही नहीं हो रहा कि हमारी प्रिय आशा ताई अब हमारे बीच नहीं रहीं। एक संगीतकार, एक फैन और एक फैमिली फ्रेंड के रूप में मैं अपने दुख को शब्दों में व्यक्त नहीं कर पा रहा हूं। मैं हमेशा उन्हें मां सरस्वती के समान मानता था। आज हर भारतीय का दिल टूट गया है।

उनका संगीत तब तक जीवित रहेगा, जब तक मानवता अस्तित्व में है। उनका योगदान शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। वह हमेशा हमारे बीच रहेंगी, हमारे फोन, टेलीविजन और हर उस मंच पर, जहां संगीत मौजूद है, उनकी आवाज दुनिया भर में गूंजती रहेगी। इस समय हम सभी गहरे शोक और दुख में हैं।’

नितिन गडकरी ने आशा भोसले के निधन पर कहा, ‘आशा ताई और मेरे बीच कई वर्षों से बेहद करीबी संबंध रहे हैं। उन्होंने कई भाषाओं में अनेक गीत गाए, जो आज भी पूरी दुनिया में लोकप्रिय हैं। वह वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध थीं। जिस तरह लता दीदी ने अपने गायन से देश का नाम रोशन किया, उसी तरह आशा ताई ने भी देश को गौरवान्वित किया।

उनका निधन उनके परिवार के लिए बहुत बड़ा आघात है। हम सभी बेहद दुखी हैं। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति दे और परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे।’

देवेंद्र फडणवीस ने कहा, ‘यह पूरे भारत और दुनिया भर के संगीत प्रेमियों के लिए दुख का पल है। वह सबसे बहुमुखी कलाकारों में से एक थीं। संगीत के प्रति उनकी सेवा और मंगेशकर परिवार का योगदान अतुलनीय रहा है। हमने पहले लता दीदी को खोया और आज यह नुकसान देख रहे हैं। हम सभी बहुत दुखी हैं। यह हम सभी के लिए एक बड़ा नुकसान है। हम शोक संतप्त परिवार के साथ खड़े हैं।’
ममता बनर्जी ने कहा कि आशा भोसले एक अद्भुत और प्रेरणादायक सिंगर थीं, जिन्होंने पीढ़ियों तक लोगों के दिलों पर राज किया। उन्होंने यह भी कहा कि आशा भोसले ने कई बंगाली गीत भी गाए और बंगाल में भी वह बेहद लोकप्रिय थीं। वर्ष 2018 में उन्हें राज्य के सर्वोच्च नागरिक सम्मान बंग विभूषण से सम्मानित किया गया था।

ममता बनर्जी ने उनके परिवार, संगीत जगत और दुनिया भर में मौजूद उनके करोड़ों प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।  महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री आशीष शेलार ने कहा कि आज पूरा देश और महाराष्ट्र एक युग के अंत पर शोक मना रहा है। उनके कार्य और उनके संगीत ने न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व को खुशी दी है।

कल सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक लोअर परेल स्थित उनके निवास पर लोग अंतिम दर्शन कर सकेंगे। इसके बाद शाम 4 बजे शिवाजी पार्क श्मशान में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी।” आशा भोषले के निधन पर डॉ. प्रतीत समदानी ने बताया, ‘यह बहुत दुखद है कि आशा भोसले जी का आज निधन हो गया। उन्हें कई मेडिकल समस्याएं थीं और मल्टी-ऑर्गन फेल्योर के कारण उनका निधन हुआ।’

आशा भोसले ने दूसरी शादी संगीतकार आरडी बर्मन से की थी। दोनों की पहली मुलाकात 1956 में हुई थी। वहीं, उनकी गहरी दोस्ती और संगीत का सफर फिल्म तीसरी मंजिल (1966) के दौरान शुरू हुआ। फिर लगातार काम करते हुए दोनों की अच्छी दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदलनी शुरू हुई।

आरडी बर्मन ने एक दिन मौका पाकर आशा के सामने शादी का प्रस्ताव रखा। आशा ने तुरंत हां कर दी थी, लेकिन बर्मन की मां ने शादी से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने बर्मन से कहा कि अगर ये शादी होगी तो मेरी लाश पर ही होगी। बर्मन की मां इसलिए इनकार कर रही थीं, क्योंकि आशा उनसे 6 साल बड़ी थीं और 3 बच्चों की मां थीं। तब बर्मन ने चुपचाप मां की बात मान ली। हालांकि, जब बर्मन के पिता एसडी बर्मन का निधन हुआ, तो मां की मानसिक स्थिति बिगड़ गई। ऐसे में मां की हालत में सुधार के लिए बर्मन ने आशा भोसले से 1980 में शादी कर ली थी।आशा भोसले और आरडी बर्मन (पंचम दा) की अपनी कोई संतान नहीं थी।

लता मंगेशकर और आशा भोसले ने साथ मिलकर “मैं चली मैं चली” और “मन क्यों बहका रे बहका” जैसे 50 से ज्यादा गाने गाए हैं। 16 साल की उम्र में आशा भोसले ने बड़ी बहन लता के 31 साल के सेक्रेटरी गणपतराव भोसले से भागकर शादी की थी। लता जी और उनका परिवार इस शादी के सख्त खिलाफ था। इसके कारण उन्होंने आशा से लंबे समय तक बातचीत बंद कर दी थी।

शादी के बाद आशा भोसले को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा और वह घरेलू हिंसा का शिकार भी हुईं। वह जिंदगी से इतनी निराश हो गई थीं कि खुद को खत्म करना चाहती थीं। 1960 में वह पहले पति से अलग हो गईं। जब आशा भोसले की पहली शादी टूट गई और वह अपने तीन बच्चों (हेमंत, वर्षा और आनंद) के साथ वापस अपने परिवार के पास आईं, तब धीरे-धीरे दूरियां कम होनी शुरू हुईं।

आशा भोसले ने 50 से 90 के दशक के बीच ओपी नैयर, आरडी बर्मन, खय्याम और बप्पी लहरी जैसे कई संगीतकारों के साथ काम किया। कई सदाबहार गाने गाए। हालांकि, एक समय ऐसा भी था जब इसी आवाज को खराब बताकर रिकॉर्डिंग स्टूडियो से वापस भेज दिया गया था। आरजे अनमोल के साथ बातचीत में आशा भोसले ने बताया था कि खराब आवाज बताकर उन्हें और किशोर कुमार को रिकॉर्डिंग स्टूडियो से बाहर जाने के लिए कहा गया था।

उन्होंने बताया था कि 1947 में वह किशोर कुमार के साथ जे.बी. रूंगटा के फेमस स्टूडियो में राज कपूर और नरगिस स्टारर फिल्म जान पहचान के लिए गाना रिकॉर्ड करने गई थीं। इस फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर खेमचंद प्रकाश थे।

आजकल स्टूडियो एयर-कंडीशन्ड होते हैं और उनमें ढेर सारी मशीनें होती हैं। उन दिनों दो ट्रैक वाली मशीनें होती थीं। एक ट्रैक संगीतकार और दूसरा गायक के लिए होता था। माइक भी एक ही रहता था और गायकों को उसके सामने खड़े होकर गाना पड़ता था।

आशा भोसले और किशोर कुमार ने गाना शुरू किया। इसके बाद साउंड रिकॉर्डिस्ट रॉबिन चटर्जी ने बंगाली में कहा था कि आप लोगों की आवाज माइक में अच्छी नहीं लग रही है। किशोर कुमार समझ गए क्योंकि वह बंगाली जानते थे। उन्होंने आशा भोसले से कहा कि कुछ गड़बड़ है। आशा कुछ नहीं बोली। रॉबिन चटर्जी ने म्यूजिक डायरेक्टर खेमचंद प्रकाश से कहा कि आप दूसरे सिंगर लाओ। इनकी आवाज गाने के लायक ही नहीं है। इसके बाद दोनों स्टूडियो से चले गए थे।

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