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पठानकोट में भारी बारिश के वजह से नदियां उफान पर : ताश के पत्तों की तरह ढह गया मकान

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पंजाब के पठानकोट में शनिवार रात से लगातार बारिश हो रही है। बारिश से जिले में हाहाकार मच गया है। जगह-जगह सड़कें गई हैं। नदियां व उज्ज दरिया उफान पर हैं। पठानकोट- चंबा हाईवे पर लैंड स्लाइड हुआ है।

पठानकोट।   पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, होशियारपुर, नवांशहर, रोपड़ और मोहाली के लिए मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है। वहीं पठानकोट में शनिवार रात के लगातार बारिश हो रही है। पठानकोट में भारी बारिश के वजह से नदियां उफान पर हैं। पठानकोट के बॉर्डर क्षेत्र में उज्ज दरिया और जलालिया दरिया के उफान पर होने के चलते गांव मंगाल को जोड़ने वाली सड़क टूटी है। पठानकोट के कंडी क्षेत्र में धार कलां के निकट फर्शी खड्ड में बाढ़ आ गई है। पहाड़ी क्षेत्र का पानी फर्शी खड्ड में आ रहा है, जिसका रौद्र रूप देख लोग दहशत में आ गए हैं। उधर दूसरी तरफ, पठानकोट के गांव कोठे मनवाल और खानपुर के बीच खड्ड के पानी के तेज बहाव में दो मंजिला घर ताश के पत्तों की तरह ढह गया। पठानकोट में बारिश से हाहाकार मचा हुआ है। सड़कें ढह गई हैं। पठानकोट में चक्की खड्ड में पानी का स्तर बढ़ जाने की वजह से के साथ लगते वार्ड नंबर-12 के सैली कुलियां क्षेत्र को खाली करवाया गया है।

पठानकोट-चंबा डल्होजी नेशनल हाईवे से पानी गुजरता देख लोग सहमे हुए हैं। यातायात प्रभावित हो रहा है। इस वजह से हाईवे पर ट्रैफिक जाम हो गया है। कई किमी तक वाहनों की कतारें लगी हुई हैं। वहीं दूसरी तरफ जलालिया दरिया का पानी खेतों तक पहुंच गया है। गांवों को जोड़ने वाली सड़कें टूट गई हैं। पठानकोट के बॉर्डर क्षेत्र से गुजरता उज्ज दरिया भी उफान पर है। पठानकोट के कंडी क्षेत्र में छोटी धार से बड़ी धार के बीच नेशनल हाईवे 154ए पर भूस्खलन हुआ है। इसकी वजह से यातायात ठप हो गया है। इसके अलावा पठानकोट-जुगयाल में भी लैंड स्लाइट होने से यातायात प्रभावित हुआ है। रंजीत सागर डैम का जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंच गया है। पानी खतरे के निशान से लगभग दो मीटर नीचे तक पहुंच गया है। डैम का अधिकतर जलस्तर 527.91 है। ऐसे में डैम प्रशासन भी सतर्क हो गया है। कभी भी डैम के फ्लड गेट खोले जा सकते हैं। पठानकोट के साथ बहते चक्की दरिया में भी पानी का स्तर बढ़ गया है। इसके अलावा जालंधर, अमृतसर, मोगा, बठिंडा में भी बरसात हो रही है।

हिमाचल में लगातार हो रही बारिश की वजह से पौंग बांध, भाखड़ा व आरएसडी में रोजाना हजारों क्यूसेक पानी बढ़ रहा है। इससे पहले शनिवार को भी हिमाचल के कई जिलों में भारी बारिश हुई, जिससे भाखड़ा, पौंग व आरएसडी के जलस्तर में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। बांधों से हजारों क्यूसेक पानी ब्यास, रावी, सतलुज समेत कई हाइडल नहरों में छोड़ा जा रहा है जिससे सूबे के कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार हजारों गांव भीषण बाढ़ की विभीषिका झेल रहे हैं और हालात यही रहे तो आगामी दिनों में हालत और बिगड़ सकती है। सरकार ने सभी नेताओं, जिलाधिकारियों से अपने-अपने क्षेत्रों का दौरा कर हालात का जायजा लेने के आदेश दिए हैं। कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने फाजिल्का में बाढ़ग्रस्त इलाके का दौरा कर हालात का जायजा लिया व लोगों से बात की।

शनिवार को रणजीत सागर बांध परियोजना की झील का जलस्तर 524.94 मीटर दर्ज किया गया था। एक्सईएन रणजीत सिंह ने कहा कि अगर यह जलस्तर 525 मीटर पर पहुंचता है तो डैम के फ्लड गेट खोले जा सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो आसपास के इलाके पूरी तरह जलमग्न हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि लोगों को सतर्क करने के लिए डैम प्रशासन लगातार अलर्ट वाले सायरन बजाता रहा।

मौसम विभाग ने अगले कुछ और दिन भारी बारिश का अलर्ट दिया है। अगर ऐसा होता है तो स्थिति चिंताजनक हो सकती है। पौंग बांध से भी लगातार पानी छोड़े जाने से ब्यास दरिया भी उफान पर है। इस वजह से ब्यास दरिया के किनारों पर बसे गांवों में चिंता का माहौल है। दो दिन में ब्यास का जलस्तर 1,16,615 क्यूसेक से बढ़कर शनिवार शाम तक 1,74000 क्यूसेक तक पहुंच गया है। एसडीएम बाबा बकाला साहिब अमनप्रीत सिंह ने लोगों के लिए अलर्ट जारी कर दिया है। नदी के किनारों पर जाने की मनाही है और राहत एवं बचाव टीमें तैयार कर दी   गई हैं।

डीसी ने की अपील

जिला पठानकोट में हो रही बारिश पर डीसी आदित्य उप्पल ने लोगों को अपील की कि जिले में बहने वाले दरिया और नाले उफान पर हैं इसलिए लोग दरिया और नालों किनारे से दूर रहें ताकि किसी भी अप्रिय घटनाओं से बचा जा सके। कहा दरिया किनारे न रहें और दरिया में किसी भी तरह की बहने वाली वस्तु को ना पकड़े। दरिया के साथ लगते गांवों में अगर बाढ़ जैसी स्थिति पैदा होती है तो वह जिला प्रशासन द्वारा स्थापित किए गए कंट्रोल रूम के फोन नंबर 01862346944 पर सूचित किया जा सके। लोगों की मदद के लिए जिला प्रशासन द्वारा अलग अलग गांव का कलस्टर बना कर सहायता केन्द्र बनाए गए हैं।

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