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DIG हरचरन भुल्लर केस : पंजाब विजिलेंस ब्यूरो की FIR सवालों के घेरे में ; खुफिया सूचना के आधे घंटे में दर्ज की; CBI कोर्ट ने पूछा- इतने टाइम में 30 साल का रिकॉर्ड कैसे जांचा

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चंडीगढ़। DIG हरचरन भुल्लर के खिलाफ पंजाब विजिलेंस ब्यूरो की तरफ से दर्ज आय से अधिक संपत्ति की FIR सवालों के घेरे में आ गई है। इसकी वजह ये है कि विजिलेंस ने जो केस दर्ज किया, उसे खुफिया सूचना मिलने के आधे घंटे बाद ही दर्ज कर दिया गया। इस पर CBI कोर्ट की जज ने पूछा कि 30 साल की सर्विस रिकॉर्ड वाले DIG की पूरी संपत्ति के बारे में विजिलेंस को आधे घंटे में ही कैसे यकीन हुआ कि संपत्ति आय से ज्यादा है।

इसके अलावा CBI कोर्ट ने DIG भुल्लर के उस दावे को भी खारिज कर दिया कि CBI की पंजाब में कार्रवाई है। CBI जज ने कहा कि भुल्लर से रिकवरी चंडीगढ़ में हुई है, जो केंद्रशासित प्रदेश है, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग के हिसाब से CBI को भुल्लर पर कार्रवाई का पूरा अधिकार है। इस संबंध में कल, गुरुवार को सुनवाई हुई थी, जिसमें भुल्लर को 5 दिन के CBI रिमांड पर भेज दिया गया। इसके बाद कोर्ट में सुनवाई की यह जानकारियां सामने आई हैं।

DIG हरचरन भुल्लर को CBI ने दोबारा से 5 दिन की रिमांड पर लिया है।- फाइल फोटो
DIG हरचरन भुल्लर को CBI ने दोबारा से 5 दिन की रिमांड पर लिया है।

जानिए, पंजाब विजिलेंस की FIR पर सवाल क्यों

विजिलेंस ब्यूरो ने DIG भुल्लर पर 29 अक्टूबर को आमदनी से ज्यादा संपत्ति का केस दर्ज किया। इसमें हवाला दिया कि सुबह 10.30 बजे उन्हें खुफिया जानकारी मिली थी। इसके बाद करीब 11 बजे भुल्लर पर केस दर्ज कर दिया गया। इस पर CBI कोर्ट की जज भावना गर्ग ने पूछा कि इसका मतलब है कि विजिलेंस ब्यूरो ने सिर्फ आधे घंटे में भुल्लर की 30 साल की इनकम की जांच कर ली, जो असंभव है।

CBI का पक्ष मजबूत क्यों रहा

CBI ने भुल्लर के खिलाफ 29 अक्टूबर को ही दोपहर साढ़े 12 बजे आमदनी से ज्यादा संपत्ति का केस दर्ज किया था। इससे पहले 16 अक्टूबर को CBI ने भुल्लर और उनके बिचौलिए कृष्नु शारदा को 5 लाख रिश्वत लेते हुए पकड़ा था। इसके बाद करीब 13 दिन की जांच की। जिसके बाद केस दर्ज हुआ। ऐसे में CBI का पक्ष मजबूत रहा और विजिलेंस के बजाय उन्हें रिमांड मिल गया।

विजिलेंस की FIR पर इसलिए भी सवाल उठे

CBI कोर्ट ने यह भी देखा कि DIG भुल्लर के पक्ष ने विजिलेंस की FIR को मोबाइल एप से डाउनलोड किया था। जिसे कोर्ट में पेश किया गया तो इसमें से एक पेज भी मिसिंग था। इसके बाद वह विजिलेंस की दर्ज की गई ओरिजिनल FIR को पेश नहीं कर सके। यही नहीं, FIR मोबाइल एप पर कब अपलोड की गई, इसके बारे में भी भुल्लर पक्ष नहीं बता सका। ऐसे में FIR की क्रेडिबिलिटी पर सवाल उठ रहे हैं।

जांच के दावों में फर्क, विजिलेंस के वकील सुनवाई से गायब

DIG भुल्लर पर दर्ज आमदनी से ज्यादा संपत्ति के केस में CBI और विजिलेंस की FIR में एक और फर्क नजर आया। विजिलेंस ने दावा किया कि भुल्लर 20 दुकानों का मालिक है। CBI ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि यह सब मनगढ़ंत बातें हैं। उनकी जांच के मुताबिक भुल्लर 50 शापिंग प्लाटों का मालिक है।  CBI ने कहा कि ये जानकारी तब आई, जब उन्होंने 13 दिन तक भुल्लर के बैंक अकाउंट और लॉकरों की जांच की। विजिलेंस ने मीडिया रिपोर्टों पर केस दर्ज कर दिया। CBI कोर्ट ने इस मामले में विजिलेंस की तरफ से वकील के पेश न होने को लेकर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि विजिलेंस की तरफ से आरोपी DIG के वकील दलीलें दे रहे हैं।

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