जालंधर प्रशासन की तरफ से मंगलवार को हाईकोर्ट में तारीख है। इसमें इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को जमीन पर कब्जे की स्थिति का जवाब देना है। इससे पहले ही प्रशासन ने पुलिस के साथ बड़ी कार्रवाई करते हुए टेंट हटाकर मलबा उठाना शुरू कर दिया। बात दें कि यहां पर बसे करीब 100 परिवारों के घरों को 2022 में ही प्रशासन ने खाली करवा लिया था। कुछ घरों को तोड़ा था जिसके बाद लोग टेंट लगाकर इस जमीन पर बैठे थे।
2022 में लोगों ने बड़े स्तर पर पुलिस कार्रवाई का विरोध किया था। इससे सबक लेते हुए पुलिस ने इस बार पहले ही विरोध के स्वर दबा दिए। बाहर से विरोध करने के लिए लोग न आ सकें, इसके लिए पुलिस ने लतीफापुरा की कब्जे वाली जगह के चारों ओर वैरिकेडिंग कर दी। किसी को भी आगे नहीं जाने दिया गया।









पुलिस ने गलियां भी बंद की, लोग घर नहीं जा पा रहे
कब्जा हटाने के पहले पुलिस ने आसपास की गलियां भी बंद कर दी हैं। कई लोग जो सैर और अन्य कामों से 7 बजे से पहले घर से बाहर निकलने थे, अब वो अपने ही घर जाने के लिए परेशान हो रहे हैं। घर से बाहर निकली पास के मोहल्ले की महिलाएं जब घर जाने के लिए गली की तरफ जाने लगीं तो वहां पुलिस ने उन्होंने रोक दिया। महिलाएं पुलिस से थोड़ा आगे जाने तक जाने की रिक्वेस्ट करती रहीं, लेकिन पुलिस ने आगे नहीं जाने दिया।
9 दिसंबर 2022 को हटाए थे कब्जे
जालंधर पुलिस ने 9 दिसंर 2022 को भारी पुलिस फोर्स के साथ सारे इलाके को सील कर दिया गया था। तब भी सुबह ही प्रशासन की टीम इलाके में बने अवैध घरों को गिराने के लिए पहुंची थी। इसके बाद लोग उनके साथ उलझ गए थे।लोगों का कहना था कि वह अपने घर खाली नहीं करेंगे बेशक उनके ऊपर से मशीनें गुजार दी जाएं।
लतीफपुरा के लोगों के समर्थन में किसान संगठनों सहित कई राजनीतिक दल समर्थन में आए थे। किसानों की भी पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के साथ बहसबाजी हुई थी।

क्या है पूरा मामला
- 1990 में 120 फुटी रोड प्रोजेक्ट की शुरुआत – यह मामला 1990 में शुरू हुआ जब अर्बन एस्टेट फेज-3 से श्री गुरु रविदास नगर तक 120 फीट चौड़ी सड़क बनाने की योजना बनी। नगर निगम ने इसके लिए सीवरेज लाइन भी डाल दी थी। लतीफपुरा मोहल्ला इसी प्रस्तावित सड़क के किनारे स्थित है, जिसकी जमीन को लेकर आज मुख्य विवाद है।
- जमीन अधिग्रहण और कागजी उलझन- शुरुआत में सड़क के लिए जमीन खरीदने का फैसला हुआ था, लेकिन बाद में इसे रद्द कर दिया गया। सरकार को वह पैसा लोगों को वापस करना था, लेकिन यह प्रक्रिया अधूरी रह गई। सबसे बड़ी उलझन यह रही कि खरीदी गई जमीन का इंतकाल सरकार के नाम दर्ज नहीं हो पाया, जिस कारण जमीन आगे बिकती रही और मालिकाना हक को लेकर कानूनी पेंच फंस गया।
- इंप्रूवमेंट ट्रस्ट और लोगों में दावों की जंग- जालंधर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट का दावा है कि उसने यह जमीन कानूनी रूप से अधिग्रहित कर ली थी और अब वह इसे कब्जामुक्त कराना चाहता है। दूसरी ओर, मोहल्ले के लोगों का तर्क है कि ट्रस्ट के पास मालिकाना हक का कोई ठोस सबूत नहीं है। लोग अदालत में केस लड़ रहे हैं और उनका कहना है कि उन्होंने अपनी जीवनभर की जमापूंजी से यहां घर बनाए हैं।
- दशकों से जारी है राजनीतिक और कब्जा लेने का संघर्ष- जमीन खाली कराने की कोशिशें कोई नई नहीं हैं। पूर्व मेयर सुरिंदर महे, राकेश राठौर और सुनील ज्योति के कार्यकाल के दौरान भी कब्जे हटाने के प्रयास किए गए, लेकिन भारी विरोध के कारण प्रशासन हमेशा विफल रहा। अब ट्रस्ट ने फिर से पुलिस बल की मांग कर इस कार्रवाई को तेज करने की कोशिश की है।
- लोगों की 100 घरों को न उजाड़ने की अपील- विवादित 10 कनाल 17 मरले जमीन पर लगभग 100 घर बने हुए हैं। स्थानीय निवासियों जैसे सरबजीत सिंह, सुखराज सिंह और अन्य का कहना है कि सरकार को उन्हें उजाड़ने के बजाय उनकी सुनवाई करनी चाहिए। उनका तर्क है कि जब सरकार अन्य कल्याणकारी योजनाएं ला रही है, तो उन्हें बेघर क्यों किया जा रहा है?
लोकल बॉडी मिनिस्टर नवजोत सिद्धू के कार्यकाल में हटाए थे कब्जे
बता दें कि मॉडल टाउन के पास स्थित लतीफपुरा से अवैध कब्जे हटाने से पहले हाईबोल्टेज ड्रामा चला था। इससे पहले विरोध में लोग धरने पर बैठ गए थे। लोगों ने करीब 8 घंटे तक धरना देकर ट्रैफिक रोका था। गुस्साए लोगों ने लोकल बॉडी मिनिस्टर नवजोत सिंह सिद्धू और कौंसलर रोहन सहगल के खिलाफ नारेबाजी भी की थी।








