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मोहाली के 22 पार्षद गायब-मोबाइल बंद, पठानकोट में गठबंधन की गहमागहमी

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चंडीगढ़ – पंजाब की आठ नगर निगमों में हुए चुनाव के बाद अब कल मेयर पद के लिए चुनाव होना है। इनमें बरनाला, बठिंडा, बटाला, मोगा और मोहाली की पांच नगर निगमों में आम आदमी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला है, जबकि अबोहर में बीजेपी और कपूरथला में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत प्राप्त है।

पठानकोट में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन बहुमत से दूर है। ऐसे में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। मोहाली के करीब 22 पार्षदों के मोबाइल बंद हैं। बताया जा रहा है कि वे हिमाचल की पहाड़ियों की सैर कर रहे हैं। वहीं, बठिंडा में मेयर पद के दावेदारों ने आम आदमी पार्टी के पार्षदों को सालासर की सैर कराई है।

मोहाली में दावेदारी पर फंसा पेंच

मोहाली नगर निगम में मेयर पद की दावेदारी पर पेंच फंस गया है। इसमें सबसे बड़ी दावेदारी मौजूदा विधायक कुलवंत सिंह के बेटे सरबजीत सिंह समाना की है। बताया जा रहा है कि 22 पार्षदों के साथ सरबजीत सिंह समाना हिमाचल पहुंच गए हैं और सभी के मोबाइल नंबर बंद आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि ये सभी पार्षद कल शपथ ग्रहण और मेयर चुनाव के समय ही हिमाचल से सीधे मोहाली पहुंचेंगे। तब तक उनका किसी से कोई संपर्क नहीं होगा।

दूसरी तरफ, वाटर सप्लाई एवं सीवरेज बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनी अहलूवालिया हैं। वे पार्टी के उच्च नेताओं के साथ जुड़े हुए हैं। इसके अलावा पति-पत्नी दोनों दूसरी बार पार्षद बनने वाली गुरमीत कौर भी मेयर की रेस में आगे हैं। चौथे नंबर पर सुखदेव सिंह पटवारी हैं, जो चौथी बार अपना चुनाव जीते हैं।

पठानकोट में किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं, कांग्रेस-आप में गठबंधन की चर्चा तेज

पठानकोट में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, लिहाजा मेयर की कुर्सी के लिए कांग्रेस-भाजपा और आम आदमी पार्टी अलग-अलग जोड़-तोड़ में जुटे हैं। कांग्रेस-आप में गठबंधन की कोशिशें तेज हो गईं हैं। इसके लिए दोनों के बीच सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए समझौता हो सकता है, जबकि भाजपा पार्षदों के जोड़-तोड़ में लगी है। बहुमत के लिए भाजपा को केवल 3 पार्षदों की जरूरत है। दूसरी तरफ, यदि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का गठबंधन होता है और एक वोट कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक्क का मिलता है, तो यह आंकड़ा 29 सीटों तक पहुंच जाता है।

बटाला में आम आदमी पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत

बटाला नगर निगम में कुल 50 वार्ड (सीटें) हैं। बहुमत के लिए किसी भी पार्टी को 26 सीटों की आवश्यकता होती है। आम आदमी पार्टी ने अकेले अपने दम पर 30 सीटें जीत ली हैं, जो बहुमत के जादुई आंकड़े 26 से 4 सीटें अधिक है। आप को मेयर की कुर्सी हासिल करने के लिए किसी अन्य दल (कांग्रेस या भाजपा) के समर्थन या जोड़-तोड़ की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है।

बटाला में आम आदमी पार्टी का मेयर बनना पूरी तरह तय है। चुनाव परिणामों में सबसे बड़ा उलटफेर वार्ड-35 और वार्ड-46 में हुआ है। यहां से आप के राज्य कार्यकारी प्रधान व स्थानीय विधायक अमनशेर सिंह शेरी कलसी के भाई अमृतपाल सिंह और उनकी बहन उत्तमगीत चुनाव हार गए हैं। उ

न्हें कांग्रेस उम्मीदवारों शशि चंदा और रविंदर तुली ने मात दी है। विधायक के परिवार के सदस्यों की हार के कारण अब आम आदमी पार्टी को अपने जीते हुए अन्य 30 पार्षदों में से ही किसी एक चेहरे को मेयर पद के लिए चुनना होगा। जिसको लेकर पार्टी मंथन कर रही है।

बठिंडा में आप ने पहली बार लड़ा चुनाव, अभी एक ही दावेदार

बठिंडा में पहली बार आप ने तमाम 50 वार्डों में चुनाव लड़ा था। जिसमें 35 पार्षद आप के, 5 कांग्रेस, 3 निर्दलीय, 1 भाजपा व अन्य उम्मीदवार जीते। निगम में मेयर पद के लिए 26 पार्षदों का बहुमत चाहिए। चूंकि 35 पार्षदों के साथ बहुमत आप के पास है इसलिए आप का ही मेयर बनाया गया है।

मेयर पद के लिए अभी तक वार्ड 46 के पार्षद व पूर्व मेयर पदमनजीत मेहता ही दावेदार नजर आ रहे हैं। इसकी एक बड़ी वजह ये है कि पिछले बार कई चुनावी आप उम्मीदवारों ने खुद अमित अरोड़ा। शहरी विधायक जगरूप सिंह गिल ने पूर्व मेयर मेहता विचार को लेकर खुशी भी जताई। बावजूद इसके पूर्व मेयर परमनजीत मेहता व उनके पिता परमेश्वर अमरजीत मेहता ने अपने बूते ही शहर में चुनाव लड़ा।

सभी प्रत्याशियों के फार्म भरवाए। उनके कार्यों में जाकर समीक्षा की। आप से इस बार कोई बड़ी जीतने या नहीं आए। ऐसे में इन दोनों ने ही मतदान के दिन बूथ मैनेजमेंट किया। नतीजा, आप के सबसे ज्यादा 35 पार्षद जीतकर निगम में पहुंचे।

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