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प्राइवेट स्कूलों पर पंजाब सरकार का बड़ा एक्शन: मनमानी फीस बढ़ाने पर लगेगी रोक, सालाना फीस बढ़ाने की लिमिट फिक्स; इससे ज्यादा बढ़ी तो मान्यता रद्द

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चंडीगढ़- पंजाब में निजी स्कूल अब मनमर्जी से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। मंगलवार को राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने सरकार के ऑर्डिनेंस को मंजूरी दे दी। इस कानून के लागू होते ही निजी स्कूलों के लिए सालाना फीस बढ़ोतरी की सीमा 5% तय हो गई है।

नियम तोड़ने पर 5 लाख रुपए तक जुर्माना और बार-बार उल्लंघन करने पर स्कूल की मान्यता भी रद्द की जा सकेगी। ऑर्डिनेंस को मंजूरी मिलने को लेकर CM भगवंत मान ने सोशल मीडिया (X) पर पोस्ट डाली। उन्होंने लिखा कि राज्यपाल का दिल से धन्यवाद, जिन्होंने पंजाब के बच्चों और अभिभावकों के हित में लिए गए हमारे बड़े फैसले पर मुहर लगा दी है।

CM ने आगे लिखा- निजी स्कूलों की फीस में मनमानी बढ़ोतरी पर रोक लगाने के लिए हमारी सरकार द्वारा लाए गए “द पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अनएडेड एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) अध्यादेश, 2026” पर राज्यपाल ने साइन कर दिए हैं। इस अध्यादेश के लागू होने के बाद अब कोई भी निजी स्कूल अपनी मर्जी से 5% से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेगा।

सीएम ने कहा कि हमारी सरकार शिक्षा को व्यापार नहीं बनने देगी और आम लोगों की जेब पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ को कम करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। 22 जून को कैबिनेट मीटिंग में इसे पास किया गया था।

1. सरकार को यह अध्यादेश लाने की जरूरत क्यों पड़ी?

पिछले कुछ सालों में निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं। पेरेंट्स का आरोप था कि कई स्कूल हर साल मनमाने ढंग से फीस बढ़ा रहे हैं। ऐसे में अब सरकार इस बहाने लोगों से सीधे जुड़ जाएगी। सरकार का कहना है कि पुराने नियमों की कमियों का फायदा उठाकर कई संस्थान जरूरत से ज्यादा फीस वसूल रहे थे। इसी को रोकने के लिए नया अध्यादेश लाया गया है।

2. अब स्कूल अधिकतम कितनी फीस बढ़ा सकेंगे?

नए नियमों के तहत कोई भी गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूल एक साल में 5% से ज्यादा फीस नहीं बढ़ा सकेगा। इससे पहले स्कूलों को 8% तक फीस बढ़ाने की अनुमति थी। लेकिन कई स्कूल ज्यादा फीस भी बढ़ा देते थे। जिसकी शिकायतें प्रशासन तक पहुंचती रहती है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी स्कूल की सालाना फीस 8,200 रुपए है, तो 5% बढ़ोतरी के बाद फीस में 410 रुपए का इजाफा होगा। ऐसे में अगले शैक्षणिक सत्र के लिए कुल फीस 8,610 रुपए हो जाएगी।

3. क्या यह नियम सिर्फ ट्यूशन फीस पर लागू होगा?

नहीं। सरकार के अनुसार यह सीमा केवल ट्यूशन फीस तक सीमित नहीं होगी। जबकि स्कूल द्वारा लिए जाने वाले अन्य अनिवार्य शुल्क, जैसे बिल्डिंग फंड, डेवलपमेंट फंड और वार्षिक शुल्क को भी इसमें शामिल किया जाएगा। कुल बढ़ोतरी 5% से अधिक नहीं हो सकेगी।

4. अगर स्कूल को 5% से ज्यादा फीस बढ़ानी हो तो क्या करना होगा?

ऐसे मामलों के लिए सरकार की तरफ एक कमेटी बनाई गई है, जिसमें डिविजनल कमिश्नर, दो डीईओ (जिला शिक्षा अधिकारी) और एक वित्तीय विशेषज्ञ शामिल होंगे। फीस बढ़ाने से कम से कम छह महीने पहले संस्थान को आवेदन देना होगा और यह बताना होगा कि फीस बढ़ाने की जरूरत क्यों है? उदाहरण के तौर पर स्कूल ने कोई नई सुविधा शुरू की है, नया भवन बनाया है, तो उसका पूरा विवरण देना होगा। हालांकि, स्कूल को आवेदन देने मात्र से फीस बढ़ाने की अनुमति नहीं मिल जाएगी। फीस बढ़ेगी या नहीं, इसका फैसला कमेटी करेगी। कमेटी भी सीधे निर्णय नहीं लेगी, बल्कि पहले संस्थान का वित्तीय ऑडिट कराया जाएगा। ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई और अंतिम फैसला लिया जाएगा

5. फीस बढ़ाने से पहले पेरेंट्स को सूचित करना होगा

सरकार ने यह फैसला लिया है कि कोई स्कूल 5 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाने जा रहा है। उसे मंजूरी मिल जाती है। तो उसके बाद उसे पेरेंटस को भी इस बारे में सूचना देनी होगी। ताकि समय रहते पेरेंट्स भी अपने आपको फीस भरने के लिए तैयार कर पाए। उन पर किसी तरह का दवाब न बन जाए।

6. क्या पहले वसूली गई अतिरिक्त फीस वापस मिलेगी?

शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के मुताबिक ऑर्डिनेंस लागू होने के साथ ही पिछले 36 महीनों में 15 फीसदी से अधिक फीस वसूलने वाले स्कूलों को अतिरिक्त राशि अभिभावकों को लौटानी होगी। सरकार इसकी निगरानी भी करेगी।

7. नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर क्या कार्रवाई होगी?

नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर जुर्माना लगाया जाएगा। बार-बार उल्लंघन करने पर उनकी मान्यता या रजिस्ट्रेशन रद्द करने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है। इसके लिए तीन कैटेगरी तय की गई और उसी हिसाब से जुर्माना तय किया गया है।

प्राइमरी तक के स्कूलों के लिए पहली बार नियम तोड़ने पर जुर्माना 50 हजार और दूसरी बार एक लाख रुपए तय किया गया है। जबकि मिडिल क्लास तक के स्कूलों के लिए पहली बार एक लाख व दूसरी बार तीन लाख जुर्माना तय किया है। 12वीं कक्षा के स्कूलों के लिए पहली बार दो लाख और दूसरी बार पांच लाख रुपए है। इसके बाद मान्यता वापस ले ली जाएगी।

8. यह नियम किन स्कूलों पर लागू होगा?

राज्य में संचालित सभी गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूल इस कानून के दायरे में आएंगे। इसमें PSEB, CBSE, ICSE और अन्य बोर्डों से संबद्ध स्कूल शामिल हैं।

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