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SHO का रिश्वत कांड: ₹50 हजार लेते रंगे हाथ पकड़ी गई, कांस्टेबल भर्ती से SI बनने तक का रिकॉर्ड जांच के घेरे में

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करीब 35 साल की SHO सुनीता बावा को गिरफ्तार किया गया है। - फाइल फोटो

मोगा– मोगा में नशा तस्करी के मामले में नामजद न करने के बदले एक लाख रुपये की रिश्वत मांगने वाली SHO सुनीता बावा पंजाब पुलिस में साल 2011 में बतौर कांस्टेबल भर्ती हुई थी। इसके बाद उसने पंजाब पुलिस विभाग का बी-1 पेपर दिया और हेड कांस्टेबल बन गई।

कुछ समय बाद ही वह फिर से पेपर देकर सब-इंस्पेक्टर बनी। SI का पद मिलने पर वह मोगा जिले के विभिन्न थानों में बतौर SHO रह चुकी है। यह भी सामने आया है कि आरोपी सुनीता बावा पर भ्रष्टाचार का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी उसके खिलाफ दर्जनों शिकायतें पुलिस विभाग व विजिलेंस विभाग के पास पहुंची हुई हैं, जिनमें कई शिकायतों की जांच अभी चल रही है।

विजिलेंस विभाग ने आरोपी इंस्पेक्टर की लंबित पड़ी शिकायतों की जांच एक बार फिर से शुरू कर दी है, जबकि विजिलेंस पुराने शिकायतकर्ता से संपर्क करने की कोशिश कर रहा है, ताकि मामले को ओर मजबूत किया जा सके।

शनिवार, 26 सितंबर को उसे 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों विजिलेंस विभाग ने गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के समय वह मोगा जिले के गांव कोट इसे खां थाने की SHO थी। 27 सितंबर को उसे अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया।

अदालत में पेश करने के बाद मीडिया से बातचीत करती एसएचओ सुनीता बावा।
अस्पताल में मेडिकल के लिए लाई गई आरोपी सुनीता बावा ने कहा था- ऑल इज वेल।
अस्पताल में मेडिकल के लिए लाई गई आरोपी सुनीता बावा ने कहा था- ऑल इज वेल।

कॉल डिटेल्स और संपर्कों की गहन पड़ताल

विजिलेंस ब्यूरो यह पता लगाने में जुटा है कि सुनीता बावा के संपर्क में कौन-कौन लोग थे। विजिलेंस अधिकारी सुनीता बावा और उनके गनमैन गुरअवतार सिंह के मोबाइल फोन के कॉल रिकॉर्ड्स की तकनीकी जांच कर रहे हैं।

यह देखा जा रहा है कि गिरफ्तारी से पहले किन-किन नंबरों पर लगातार बातचीत हुई थी। फोन से डिलीट किए गए मैसेज, चैट्स और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन की डिजिटल फोरेंसिक जांच की जा रही है ताकि यह साफ हो सके कि यह पहली बार था या इस खेल का पुराना नेटवर्क चल रहा था।

बिचौलियों की भी तलाश हो रही

विजिलेंस में यह भी जांच जारी है कि पुलिस विभाग या बाहरी लोगों में ऐसे कौन लोग हैं, जो इस तरह के मामलों में मिलीभगत या मध्यस्थता करते थे। किन लोगों के जरिए मामलों को रफा-दफा किया जाता था। इसकी एक-एक कड़ी जोड़ी जा रही है।

वहीं, एक महिला इंस्पेक्टर के पास अवैध कमाई का कितना साम्राज्य है, यह जानने के लिए विजिलेंस अब उनकी संपत्तियों की फाइलों को खंगाल रही है। सुनीता बावा और उसके परिवार के नाम पर दर्ज मकान, प्लॉट, कमर्शियल प्रॉपर्टी या कृषि भूमि के कागजात जुटाए जा रहे हैं।

आय से अधिक संपत्ति का एंगल

विजिलेंस इस बात की जांच कर रही है कि उसकी वैध सैलरी के मुकाबले उनकी संपत्ति में कितना असंतुलन है। यदि उनकी संपत्ति आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक पाई जाती है, तो आने वाले दिनों में उसके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का एक और नया मामला दर्ज किया जा सकता है। उसके और उसके करीबियों के बैंक खातों, फिक्स डिपॉजिट और बैंक लॉकरों की जानकारी हासिल करने के लिए बैंकों को पत्र लिखने की तैयारी कर ली है।

पिछले कार्यकालों और थानों की फाइलों की समीक्षा

चूंकि, सुनीता बावा पहले भी कई अन्य थानों में तैनात रह चुकी है, इसलिए विजिलेंस अब उसके पुराने कार्यकालों की भी समीक्षा कर रही है। उसके पिछले थानों में दर्ज उन मामलों को खंगाला जा रहा है जिन्हें संदिग्ध तरीके से रफा-दफा किया गया था या जिनमें फाइलें अटकाई गई थीं।

गनमैन के साथ हुई गिरफ्तार

विजिलेंस ब्यूरो ने 26 सितंबर की रात को SHO सुनीता बावा और उसके सरकारी गनमैन होमगार्ड जवान गुरअवतार सिंह को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था। नूरपुर हकीमा के रहने वाले बलवंत सिंह ने विजिलेंस ब्यूरो मोगा में शिकायत की थी कि थाने की SHO एक केस को निपटाने के बदले रिश्वत मांग रही है।

शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस ब्यूरो ने जाल बिछाया। टीम ने गवाहों के सामने जीरा रोड पर एक तय जगह पर 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए थाने की एसएचओ और उसके गनमैन को गिरफ्तार किया।

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