कांग्रेस ने साफ किया है कि जरूरत पड़ने पर वह इस मामले में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। कांग्रेस जिला प्रधान राजिंदर बेरी ने इस पूरे मामले पर पार्टी का रुख साफ करते हुए कहा है कि सरकार या प्रशासन कानून से ऊपर नहीं जा सकता।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस भवन की जमीन पूरी तरह से वैध है और इसे इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट द्वारा पार्टी को आवंटित किया गया था, इसलिए मुख्य इमारत को गिराने का कोई सवाल ही नहीं उठता। विवाद केवल परिसर में बनी दुकानों और बाय-लॉज के उल्लंघन को लेकर है, जिसका समाधान कानूनी दायरे में ही निकाला जाएगा।
पार्टी दुकानदारों को बेरोजगार नहीं होने देगी
कांग्रेस जिला अध्यक्ष के अनुसार दुकानों में काम करने वाले दुकानदार पिछले 40 सालों से किराएदार के रूप में अपनी रोजी-रोटी कमा रहे हैं। कई परिवारों का गुजर-बसर इन्हीं दुकानों पर निर्भर है। पार्टी किसी भी सूरत में इन दुकानदारों को बेरोजगार नहीं होने देगी और हर संभव कानूनी व प्रशासनिक मदद मुहैया कराएगी।
कांग्रेस ने नगर निगम में आवेदन दायर किया
विवाद का हल निकालने के लिए कांग्रेस ने नगर निगम (एमसी) में एक आवेदन दायर किया है। इसमें राज्य सरकार के लोकल बॉडीज एक्ट में हुए उस हालिया संशोधन का हवाला दिया गया है, जिसमें 10 साल से पुराने किसी भी निर्माण (चाहे वह घरेलू हो या व्यावसायिक) को ढहाए बिना फीस लेकर नियमित (कम्प्रोमाइज/कंपाउंड) करने का प्रावधान है।
जुर्माना देने को तैयार पार्टी
कांग्रेस पार्टी ने घोषणा की है कि नियमों के मुताबिक जो भी जुर्माना या कम्प्रोमाइज फीस बनेगी, उसे कांग्रेस कार्यालय अपनी तरफ से जमा करवाने के लिए पूरी तरह तैयार है। पार्टी का मानना है कि दुकानदारों को शायद कानून में हुए इस नए बदलाव की जानकारी नहीं थी, जिस वजह से अदालत में उनका पक्ष कमजोर पड़ा।
रक्षा के लिए कानूनी लड़ाई आखिरी तक लड़ेगी
यदि नगर निगम इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करता है या जल्दबाजी में कोई सख्त कदम उठाने की कोशिश करता है, तो कांग्रेस पार्टी इस संशोधन कानून की प्रति लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। पार्टी का कहना है कि वह अपने किराएदारों के रोजगार को बचाने और कांग्रेस भवन के अस्तित्व की रक्षा के लिए कानूनी लड़ाई आखिरी तक लड़ेगी।








