चंडीगढ़/लुधियाना। पंजाब में नशा छुड़ाओ केंद्रों से मरीजों को दी जाने वाली दवाइयों ब्यूप्रीनोर्फिन और नलेक्सॉन को गैरकानूनी तरीके से बाहर बेचने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है।
मुंबई स्थित रुसन फार्मा लिमिटेड केस में ईडी ने आरोपी डॉ. अमित बंसल, उनके परिवारों और नशा छुड़ाओ केंद्रों से जुड़े बैंक खातों में 21 करोड़ रुपये सीज किए हैं। ईडी की टीम ने बैंक खातों में 21 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन के सोर्स का पता लगाने में जुट गई है। ईडी के अधिकारियों ने बताया कि पंजाब के इन 22 प्राइवेट नशा छुड़ाओ केंद्रों के नाम पर खोले गए बैंक खातों का इस्तेमाल धन शोधन के उद्देश्य से भी किया गया।
युवाओं तक पहुंच रहीं प्रतिबंधित नशीली दवाइयां
ईडी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अब तक के दस्तावेजों, दवाइयों के रिकॉर्ड और स्टॉक से यह साबित होता है कि जो दवाइयां केवल नशा छुड़ाओं केंद्रों पर पंजीकृत मरीजों के इलाज में प्रयोग की जानी थी, उन्हें प्राइवेट नशा छुड़ाओ केंद्रों के जरिये बाकी युवाओं तक पहुंचाया गया। नशा करने वाले युवाओं तक इनकी खेप को पहुंचाने में ड्रग इंस्पेक्टरों की भी भूमिका सामने आई है। ये सभी नशा छुड़ाओ केंद्र डाॅ. अमित बंसल चला रहा था। जनवरी 2025 में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने ड्रग इंस्पेक्टर रूप प्रीत कौर को गिरफ्तार किया था। आरोपी ड्रग इंस्पेक्टर की कस्टडी से नशीली दवाइयों की खेप और ड्रग मनी बरामद हुई थी। यहां तक कि ड्रग इंस्पेक्टर जिस सेंटर की इंचार्ज थी, वहां 4 हजार दवाइयों की शॉर्टेज सामने आई थी।
दवाइयों का स्टॉक गायब
ईडी की जांच में सामने आया है कि जालंधर के नकोदर में एक नशा छुड़ाओ केंद्र से लगभग 1.44 लाख ब्यूप्रेनोर्फिन और नलाक्सोन की दवाइयों का स्टॉक गायब है। डॉ. बंसल के केंद्रों से नशीली दवाइयों के स्टॉक रिकॉर्ड में बड़े स्तर पर गड़बड़ी पाई गई है। ईडी ने ड्रग इंस्पेक्टर रूप प्रीत कौर के लिंक को भी खंगालना शुरू कर दिया है। इन नशीली दवाइयों को बाहर मार्केट में सस्ती दरों पर बेचने में उसकी अहम भूमिका रही है।








