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पीआरटीसी में आर्थिक संकट गहराया: मुफ्त बस सफर का 700 करोड़ सरकार पर बकाया, वेतन को तरसे मुलाजिम

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पटियाला । पंजाब सरकार की मुफ्त बस सफर की सुविधा पीआरटीसी के लिए गले की हड्डी बनी है। मुफ्त बस सफर का 700 करोड़ सरकार पर पेंडिंग है, जिसका भुगतान न हो पाने से मुलाजिम अपनी तनख्वाह पाने के लिए तरस रहे हैं। जुलाई महीना खत्म होने में अब कुछ दिन शेष हैं। सरकार के इस रवैये से आर्थिक मुश्किल में फंसी पीआरटीसी अपने मुलाजिमों के सेवामुक्ति लाभ और अन्य एरियर का भुगतान नहीं कर पा रही है। यह बकाया तकरीबन 170 करोड़ रुपये पहुंच चुका है।

पिछले तीन वर्षों से पीआरटीसी के बेड़े में कोई नई बस शामिल नहीं हो सकी है। गौरतलब है कि पंजाब में कैप्टन सरकार के राज में महिलाओं के लिए मुफ्त बस सफर की सुविधा शुरू की गई थी। तब से पीआरटीसी को कभी मुफ्त सफर का बकाया का भुगतान नियमित नहीं हो सका है। पीआरटीसी में इस समय करीब 700 रेगुलर मुलाजिम हैं, जिन्हें जुलाई महीने की तनख्वाह अभी तक नहीं मिल सकी हैं।

धरने-प्रदर्शन के बाद पीआरटीसी के ठेका मुलाजिमों और पेंशनरों को उनकी तनख्वाह तो 17 जुलाई को मिल गई हैं। नियमित मुलाजिम अभी भी तनख्वाह के लिए तरस रहे हैं।  पीआरटीसी के एक अधिकारी ने बताया कि तनख्वाह और पेंशन का हर माह का बजट तकरीबन 30 करोड़ है। सरकार मुफ्त बस सफर के हर महीने 27 से 28 करोड़ जारी कर देती थी। इस बार केवल 22 करोड़ मिले हैं। जिसके चलते रेगुलर मुलाजिमों को तनख्वाहें नहीं मिल सकी हैं। उम्मीद है कि शुक्रवार तक 5.43 करोड़ रुपये की राशि मिल जाएगी, जिसके बाद तनख्वाह दे दी जाएंगी।

उधर, भड़के मुलाजिमों ने शुक्रवार सुबह पीआरटीसी के हेडआफिस के बाहर धरना देने का एलान कर दिया है। मुलाजिम नेता उत्तम सिंह बागड़ी, निर्मल सिंह धालीवाल ने कहा कि कर्मचारियों की हर महीने की जरूरतों को पूरा करने के लिए समय पर वेतन नहीं मिलने से उन्हें काफी दिक्कत हो रही है। ऐसे हालात में पीआरटीसी के पेंशनरों, नियमित और ठेका कर्मचारियों में अनिश्चितता और निराशा का माहौल है। फिर भी कर्मचारी बिना कोई पारिश्रमिक लिए पूरी निष्ठा से विभाग और जनता की सेवा कर रहे हैं।

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