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जालंधर के चौगिट्टी चौक के पास बसे अंबेडकर नगर में 800 मकान गिराने की तैयारी: पावरकॉम ने 24 घंटे का समय दिया;  लोग बोले- 80 साल से रह रहे, कहां जाएंगे

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जालंधर।  पंजाब में जालंधर के चौगिट्टी चौक के पास बसे अंबेडकर नगर में महिलाएं रो रही हैं। बच्चे, बूढ़े, जवान सब चिंतित हैं, सहमे हुए हैं। कारण यहां के लगभग 800 घरों को गिराने के लिए पावरकॉम ने 24 घंटे का समय दिया है। आज कोर्ट में पावरकॉम के अधिकारी जमीन पर कब्जा लेने के लिए जाएंगे।

पावरकॉम का दावा है कि यहां उनकी 65 एकड़ जमीन है। इस पर लोगों का कब्जा है।digitalindia24 की  टीम अंबेडकर नगर पहुंची और यहां ग्राउंड रियलिटी जानी। चौगिट्टी से लद्देवाली फ्लाइओवर के ठीक नीचे ये घर बसे हैं। फ्लाइओवर के साथ संकरी टाइलों की सड़क इस नगर को मेन रोड से जोड़ती है।

अंबेडकर नगर में घुसते ही सुरजन सिंह से मुलाकात हुई। सुरजन ने कहा कि 1986 से बिजली बोर्ड के साथ केस चल रहा है। 2 बार हम केस जीत चुके हैं। चौथी पीढ़ी यहां पर रह रही है। करीब 800 घर यहां हैं। मुझे यहां 50 साल हो गए। एक-एक ईंट जोड़कर घर बनाए हैं। अब उजड़ जाएंगे तो कहां जाएंगे।  सुरजन ने कहा कि हमारे छोटे-छोटे बच्चे कहां जाएंगे। हम इंडिया में रह रहे हैं, कोई पाकिस्तान से थोड़े आए हैं। भगवंत मान सरकार से अपील करते हैं कि हमें बचाया जाए।

जालंधर के अंबेडकर नगर में बना मंदिर और चर्च का चल रहा रेनोवेशन।
जालंधर के अंबेडकर नगर में बना मंदिर और चर्च का चल रहा रेनोवेशन।

 

मंदिर-गुरुद्वारा और चर्च बनाए गए हैं

सुरजन ने कहा कि अंबेडकर नगर में मंदिर, गुरुद्वारा और चर्च भी बने हैं। गुरुघरों को गिराना कहां तक जायज है। इन सभी गुरुघरों का उद्घाटन जालंधर के नेताओं के हाथों से हुआ है। क्या तब किसी को ये पता नहीं था कि ये जमीन पावरकॉम की है। तब पावरकॉम के अधिकारियों ने किसी के साथ भी ऑब्जेक्शन नहीं किया।

सुरजन ने कहा कि हमें तो आज तक बिजली विभाग की तरफ से कोई नोटिस नहीं दिया गया है। अब भी तीन अफसर आए थे और कहकर चले गए कि घर खाली कर दो। हम न तो अपने घर खाली करेंगे और न ही इस मोहल्ले को छोड़ेंगे। चाहे कुछ भी हो जाए।

परमजीत कौर रोते हुए मामले की जानकारी देतीं अंबेडकर नगर की महिलाएं।
परमजीत कौर रोते हुए मामले की जानकारी देतीं अंबेडकर नगर की महिलाएं।

 

सरकार चाहे तो मार दे, घर नहीं छोड़ सकते

अंबेडकर नगर में पहुंचते ही यहां की लास्ट गली में महिलाएं digitalindia24  की टीम को देखते ही एकत्रित हो गईं। माइक पर आते ही परमजीत कौर का का गल रुंध गया। कहने लगी कि मेरी यही विनती है कि हमें हमारे घरों में रहने दिया जाए।

उन्होंने कहा कि हम अपने घरों को नहीं छोड़ सकते। चाहे तो हमें मार दो। लेकिन यहां से निकाला न जाए। हमारे बच्चे यहीं पर पैदा हुए और यहीं पढ़े। हमने पूरी जिंदगी की कमाई यहीं पर लगा दी है। हमारे पास इतना पैसा नहीं है कि कहीं और जाकर रह सकें।

आज तक जो कमाया यहीं पर लगा दिया- ज्ञान कौर

एक अन्य महिला ज्ञान कौर ने कहा कि एक तरफ तो सरकार हमें लेंटर डालने के पैसे दे रही है और दूसरी तरफ हमें उजाड़ा जा रहा है। हमारे बच्चों ने आज तक जो कमाया यहीं पर लगा दिया। अब बच्चे लेकर कहां जाएंगे। महिलाओं ने कहा कि हमारे हक की बात की जाए।

महिला ने कहा कि हम डेली वेज वाले हैं। रोज कमाते हैं, तभी खाते हैं। एक अन्य महिला ने कहा कि हमें यहां पानी की सुविधा है, सड़कें हैं। सरकारी ग्रांटें मिली हैं। तब सरकार तो पता नहीं था कि हमारे घर सरकारी जमीन पर हैं। हम यहां से कहीं नहीं जाना चाहते। हम मरते मर जाएंगे। लेकिन यहां से बाहर नहीं जाएंगे।

अंबेडकर नगर की महिलाओं ने कहा कि यहां करीब 4 हजार लोग रहते हैं।
अंबेडकर नगर की महिलाओं ने कहा कि यहां करीब 4 हजार लोग रहते हैं।

 

करीब 4 हजार लोग, इतनी जनता कहां जाएगी

परमजीत कौर ने कहा कि यहां करीब 4 हजार लोग हैं। इतनी जनता कहां जाएगी। गाड़ियों के नीचे लेट जाएंगे, जान दे देंगे। लेकिन मकान नहीं गिराने देंगे। हम मर जाएंगे। लेकिन यहां से निकलेंगे नहीं। अगर सरकार हमारे घरों को गिराने के लिए बुलडोजर लेकर आएगी तो हम गाड़ियों के आगे लेट जाएंगे।

महिला ने कहा कि हम मकान नहीं गिराने देंगे। हमें तो रात को तीन दिन से नींद नहीं आ रही है। भूख लग रही है, मगर खाना अंदर नहीं जा रहा है। बच्चे सहमे हुए हैं।

अंबेडकर नगर में नेताओं द्वारा किए गए उद्घाटनों के लगे हुए पत्थर।
अंबेडकर नगर में नेताओं द्वारा किए गए उद्घाटनों के लगे हुए पत्थर।

 

अंबेडकर नगर के लोगों ने बताईं कई अहम बातें…

  • 70 साल तक डेवलपमेंट कैसे देखते रहे: पवन कुमार ने कहा कि अगर ये नगर अवैध था तो पहले याद क्यों नहीं आया। अंबेडकर नगर के साथ ही पावरकॉम का दफ्तर है। वे अपनी आंखों के सामने 70 साल तक होते हुए डेवलपमेंट कैसे देखते रहे। तब क्यों नहीं लोगों को रोका गया। अगर पहले ही रोक दिया होता तो 70 सालों में इतने घर न बसते।
  • 1984 के दंगा पीड़ितों को ग्रांट मिलीं: पवन ने कहा कि यहां रहने वाले सभी लोग गरीब तबके से आते हैं। सबने तिनका-तिनका कर यहां पर घर बनाएं हैं। न तो ये घर रातों-रात बने और न ही किसी ने कहीं पर कोई कब्जा किया। इतना ही नहीं 1984 दंगा पीड़ितों को ग्रांट तक मिली हैं।
  • उजाड़ने की जगह जमीन का पैसा ले सकती है सरकार: पवन कुमार ने कहा कि वह CM भगवंत मान ने नाम जालंधर DC डॉक्टर हिमांशु अग्रवाल को मांग पत्र भी देंगे। CM से अपील करेंगी कि उनके एक साइन से उनके घर बस सकते हैं। अगर पावरकॉम या सरकार को अब सरकारी जमीन की याद आई है तो हमें किस्त लगा दें। हम धीरे-धीरे पैसा भर देंगे। लेकिन अगर हमें यहां से जबरदस्ती उजाड़ने की कोशिश की गई तो उसका नतीजा सही नहीं निकलेगा।

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