जालंधर। जालंधर शहर में शनिवार और रविवार को छठ पूजा की तैयारियां जोरों पर रहीं। श्रद्धालु नहर के किनारों और घाटों पर भगवान सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन इन घाटों की बदहाली देखकर लोगों में नाराज़गी साफ झलक रही है। नगर निगम के सेनिटशन विभाग के अधिकारियों की अनदेखी के कारण लोग परेशान हो रहे है वही मेयर खुद रुटबना रहे।
भले ही मेयर विनीत धीर के निर्देश पर नगर निगम के सेनिटेशन विभाग ने कुछ जगहों पर सफाई अभियान चलाया हो, लेकिन सच्चाई यह है कि लंबे समय से इन क्षेत्रों पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। पूरे इलाके और नहर के आस-पास गंदगी का आलम ऐसा है कि कई महीनों तक लगातार सफाई करने पर भी यह पूरी तरह से साफ नहीं हो पाएगी।
जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर और जमा गंदगी ने श्रद्धालुओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खास तौर पर जहाँ नहर की पुलिया हैं, वहां इतना ज़्यादा कूड़ा जमा है कि पानी का बहाव तक रुक गया है। इससे आगे पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
निगम की लापरवाही पर जनता का गुस्सा
लोगों का कहना है कि यदि निगम ने समय रहते नियमित रूप से सफाई की होती, तो छठ जैसे बड़े त्योहार के समय इतनी अव्यवस्था नहीं होती। अब जब त्योहार बिल्कुल नज़दीक है, तो निगम ने जल्दबाज़ी में सफाई शुरू की है, और वह भी सिर्फ कुछ चुनिंदा स्थानों पर। यह दिखाता है कि नगर निगम अपनी ज़िम्मेदारी को लेकर कितना लापरवाह रहा है।

मेयर ने संभाली खुद कमान, अधिकारियों पर उठे सवाल
इन दिनों मेयर विनीत धीर शहर को साफ-सुथरा और सुंदर बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। लेकिन त्रासदी यह है कि उन्हें खुद सेनिटेशन इंचार्ज की भूमिका निभानी पड़ रही है। सफाई कर्मचारियों और अधिकारियों की घोर लापरवाही के कारण, मेयर को खुद ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के रूट तय करने पड़ रहे हैं, सफाई की मॉनिटरिंग करनी पड़ रही है। मौक़े पर जाकर निरीक्षण भी खुद ही करना पड़ रहा है।
विनीत धीर के इन व्यक्तिगत प्रयासों के बावजूद, बड़ा सवाल यह उठता है कि नगर निगम के ज़िम्मेदार अधिकारी आख़िर क्या कर रहे हैं? जब शहर के मेयर को खुद सफाई व्यवस्था संभालनी पड़ रही है, तो जवाबदेह अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठना लाजमी है।
त्योहार पर नहीं, रोजाना हो सफाई
शहरवासियों का कहना है कि सफाई सिर्फ त्योहारों पर नहीं, बल्कि पूरे साल रोज़ाना होनी चाहिए। लोगों का मत है कि जब तक नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी अपनी ज़िम्मेदारी को सही ढंग से नहीं निभाएंगे, तब तक शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाना सिर्फ एक सपना ही बनकर रह जाएगा। यह पूरी स्थिति नगर निगम के कामकाज और उसकी प्राथमिकता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।








