best news portal development company in india

कल से चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ: इस मुहूर्त में करें कलश स्थापना, बरसेगी मां की कृपा

SHARE:

ज्योतिषाचार्य राकेश जैन स्वर्ण पदक विजेता जालंधर ने बताया कि चैत्र नवरात्रि देवी दुर्गा की उपासना को समर्पित त्योहार है। यह चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तक मनाया जाता है। मान्यता है कि, इन दिनों में मां दुर्गा स्वयं पृथ्वी पर आकर अपने भक्तों के बीच विराजमान रहती हैं। साथ ही सच्चे मन से की गई पूजा, जप और तपस्या का कई गुना फल साधक को प्रदान करती हैं। हिंदू धर्म में इस अवधि को आत्मा के जागरण और शक्ति की साधना का दिव्य समय माना गया है। यही नहीं यह पावन अवधि साधक के भीतर की नकारात्मकता को समाप्त कर नई ऊर्जा का प्रवाह करती हैं। इस वर्ष 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो रही हैं। इस तिथि पर कई शुभ संयोग का साया बना हुआ है, जो पूजा-पाठ के लिए बेहद लाभकारी है। ऐसे में आइए इस दिन के महत्व और पूजन विधि को विस्तार से जानते हैं।

चैत्र नवरात्रि 2026 तिथि 

  • पंचांग के अनुसार, चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 06 बजकर 52 मिनट पर प्रारंभ होगी।
  • यह तिथि 20 मार्च को सुबह 04 बजकर 52 मिनट पर समाप्त होगी।
  • तिथि के मुताबिक, चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 19 मार्च 2026 से मान्य होगा।

कलश स्थापना शुभ समय

  • इस साल चैत्र नवरात्रि पर कलश स्थापना के लिए सबसे शुभ समय सुबह 06 बजकर 52 मिनट से सुबह 07 बजकर 43 मिनट तक रहेगा।
  • कलश स्थापना के लिए दूसरा सर्वश्रेष्ठ समय दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक है।

चौघड़िया के अनुसार शुभ समय

  • शुभ (उत्तम): सुबह 06:26 से 07:57
  • लाभ (उन्नति): दोपहर 12:29 से 02:00
  • अमृत (सर्वश्रेष्ठ): दोपहर 02:00 से 03:30

19 मार्च 2026 शुभ संयोग

19 मार्च से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होगी। इस दिन हिंदू नववर्ष के साथ-साथ गुड़ी पड़वा भी मनाया जाएगा। इस तिथि पर उत्तराभाद्रपद नक्षत्र और शुक्ल योग का संयोग रहेगा। वहीं मीन राशि में सूर्य और शुक्र की युति होने से शुक्र आदित्य राजयोग का निर्माण भी हो रहा है, जो बेहद शुभ है।

क्या है माता का वाहन ?

2026 में चैत्र नवरात्रि में देवी मां के आगमन का वाहन पालकी होगा। जबकि उनकी विदाई का वाहन हाथी रहेगा। 

  • पहला दिन: मां शैलपुत्री
  • दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी
  • तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा
  • चौथा दिन: मां कूष्मांडा
  • पांचवा दिन: मां स्कंदमाता
  • छठा दिन: मां कात्यायनी
  • सातवां दिन: मां कालरात्रि
  • आठवां दिन: मां महागौरी
  • नौवां दिन: मां सिद्धिदात्री

नवरात्रि में ऐसे करें पूजा और कलश की स्थापना 

  • नवरात्रि पूजन के लिए सबसे पहले घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में एक स्वस्तिक बना लें।
  • एक साफ माता की चौकी रखें और उसपर लाल रंग का वस्त्र बिछाएं।
  • अब देवी की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित करें।
  • देवी को लाल चुनरी पहनाएं और फूलों का माला अर्पित करें।
  • अब आप मां दुर्गा का पूरा श्रृंगार करें और अंत में इत्र अवश्य लगाएं।
  • इसके बाद कलश स्थापना के लिए एक मिट्टी का पात्र लेकर उसमें साफ मिट्टी को भर दें।
  • इसमें कुछ जौ के बीज डाले और साफ पानी में गंगाजल मिलाकर इसपर थोड़ा छिड़काव करें।
  • फिर तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें सुपारी, सिक्का, चावल और कुछ बताशें डाल दें।
  • अब लोटे पर कलावा बांधें और उसपर टिका लगाएं।
  • 7 अशोक के पत्ते लेकर उसे लोटे में डालें।
  • अब एक पानी वाला नारियल लेकर उसे चुनरी पहनाएं और उसे कलावे से बांध दें।
  • चुनरी वाले नारियल को लोटे के ऊपर रखें और उसे रोली से तिलक लगाएं।
  • इस कलश को जौ वाले पात्र के बीच में स्थापित कर लें।
  • अब शुद्ध देसी घी का दीपक जलाएं और धूप उठा लें।
  • धूप पर लौंग का जोड़ा रखें और कपूर जलाएं।
  • देवी को फल, मिठाई और सूखे मेवे भोग के रूप में अर्पित करें।
  • दुर्गा सप्तशती का पाठ कर लें और अंत में आरती करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

best news portal development company in india
सबसे ज्यादा पड़ गई