जालंधर- जालंधर के शाकाहारी बॉडीबिल्डर वरिंदर घुम्मन कीमौत के मामले में अमृतसर पुलिस SIT की रिपोर्ट के बाद चार डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। इस मामले पर घुम्मन के भाई रब्बी ने कहा कि कमजोर धारा में अभी केस दर्ज किया गया है। वहीं, घुम्मन के भाई रब्बी ने अस्पताल के बयानों और जांच रिपोर्ट में बड़े विरोधाभास का दावा करते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
SIT की रिपोर्ट आने के बाद घुम्मन के भाई रब्बी के आरोप ECG में हृदय संबंधी खतरों के मिले थे संकेत
घुम्मन के भाई ने बताया की प्री-एनेस्थेटिक चेकअप (PAC) में ECG ने हृदय संबंधीखतरों के संकेत मिले थे, लेकिन डॉक्टरों ने इसे अनदेखा किया। इसके अलावा हार्ट जैसे बीमारियों के लिए इको कार्डियोग्राफी जैसी अनिवार्य जांच नहीं कराई गई। इसके अलावा हार्ट के किसी विशेषज्ञ से राय तक नहीं ली गई।
सर्जरी का समय 2 घंटे था लेकिन 5 घंटे लगे
रब्बी ने कहा कि डॉक्टरों ने बताया था की ऑपरेशन में लगभग 2 घंटे लगेंगे, लेकिन मेडिकल रिकॉर्ड के अनुसार सर्जरी में 5 घंटे का लंबा समय लगा। मरीज के भारी शरीर और बड़े रोटेटर कफ टियर के कारण समय बढ़ना स्वाभाविक हो सकता था, लेकिन इस दौरान इंट्रा-ऑपरेटिव काउंसलिंग की भारी कमी रही। अस्पताल प्रशासन ने लंबी खींचती सर्जरी के बारे में परिजनों को सूचित नहीं किया
कार्डियोलॉजिस्ट विशेषज्ञो के कोई नोट्स नहीं मिले
रब्बी ने कहा कि एनेस्थीसिया के असर से बाहर आते समय मरीज को VT स्टॉर्म (हृदय गति का बिगड़ना) आया, जिसे संभालने के लिए बुलाए गए कार्डियोलॉजिस्ट विशेषज्ञो के कोई नोट्स घुम्मन के मेडिकल फाइल में दर्ज नहीं है। इसके साथ ही, सीपीआर के दौरान ‘इंट्रा कार्डिएक एड्रेनालाइन’ दिया गया, जो मानक ACLS चिकित्सा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। यह डॉक्टरों की लापरवाही को दर्शाता है।
घुम्मन के फाइल के साथ अस्पताल ने की छेड़छेड़ा
रब्बी बताते है कि घुम्मन की मौत पहले ही अस्पताल में हो गई थी, लेकिन अस्पताल के लोगों नें परिवार को डेथ के बारे में लेट बताया। इसके अलावा जब परिवार के लोगों ने घुम्मन की फाइल मांगी तो उसको लगभग छह घंटे बाद परिवार को दिया गया, उन्होंने आरोप लगाया की हास्पिटल को लोगों ने घुम्मन के फाइल के साथ भी छेड़छाड़ किया था।
बता दें कि 9 अक्टूबर 2025 को अमृतसर में सर्जरी के दौरान वरिंदर घुम्मन का निधन हो गया था। परिवार ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगाए थे। परिजनों का कहना था कि ऑपरेशन के बाद शव की स्थिति संदिग्ध थी। सिर से कंधे तक शरीर का रंग काला-नीला पड़ गया था।
SIT कर रही थी जांच
जिला अमृतसर प्रशासन की स्पेशलिस्ट डॉक्टरों पर आधारित एसआईटी वरिंदर घुम्मन के मामले में जांच कर रही थी। बीते माह एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट सब्मिट की। जिसमें स्पष्ट लिखा गया कि घुम्मन की मौत अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों की लापरवाही से हुई। ऑपरेशन के दौरान कोई भी प्रोटोकॉल फोलो नहीं किए गए।








