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जालंधर के गुरुद्वारे में दिखाई गई दिलजीत दोसांझ की ‘सतलुज’, कमेटी बोली- OTT से हटाई गई फिल्म अब घर-घर पहुंचाएंगे

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जालंधर – जालंधर स्थित जीटीबी नगर गुरुद्वारा साहिब में दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म ‘पंजाब 95’ की विशेष स्क्रीनिंग की गई। गुरुद्वारा कमेटी ने एक बड़ा कदम उठाते हुए फिल्म को बड़ी स्क्रीन पर संगत को दिखाया।

कमेटी के सदस्यों का दावा है कि इस फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म से जबरन हटवाया गया है, जिसके विरोध में अब पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में स्थित गुरुद्वारों में इसे बड़ी स्क्रीनों पर दिखाने का सिलसिला शुरू हो चुका है।

प्रबंधक कमेटी के एक वरिष्ठ सदस्य ने इस ऐतिहासिक पहल की शुरुआत सिख जयकारे “वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह” और गुरबाणी की पंक्तियों “सूरा सो पहचानिए जो लड़े दीन के हेत…” के साथ की।

जालंधर में गुरुद्वारे में दिखाई सतलुज फिल्म। - Dainik Bhaskar

उन्होंने भावुक और आक्रामक लहजे में कहा कि जो पीढ़ी 1984 या 1990 के दशक के बाद पैदा हुई है, उसे पंजाब के उस दौर के कड़वे सच और इतिहास के बारे में कुछ भी नहीं पता है। हमारा मुख्य उद्देश्य हमारी नई जनरेशन को अपने इस दर्दनाक और संघर्षमयी इतिहास से जोड़ना है।

सिख युवाओं के साथ गलत हुआ

कमेटी मेंबर ने आरोप लगाया कि साल 1984 के बाद पंजाब के गांवों से सिख युवाओं को बिना किसी वजह के जबरन उठाया जाता था, उन्हें बेहद प्रताड़ित करके मार दिया जाता था और बंगाल आदि जगहों पर झूठे एनकाउंटर दिखाकर केस सुलझाने का दावा किया जाता था।

हद तो तब हो जाती थी जब उन मृत बच्चों के शव भी उनके परिजनों को नहीं सौंपे जाते थे। ऐसे दौर में मानवाधिकार कार्यकर्ता और अकाली दल के तत्कालीन महासचिव भाई जसवंत सिंह खालड़ा ने अपनी जान की परवाह न करते हुए श्मशान घाटों और नगर निगमों के रिकॉर्ड्स खंगाले। उन्होंने अथक मेहनत करके हजारों लावारिस घोषित किए गए शवों का असल रिकॉर्ड दुनिया के सामने लाकर रख दिया।

दिलजीत ने बहुत मेहनत से फिल्म बनाई

उन्होंने कहा कि अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने बहुत मेहनत से यह फिल्म बनाई थी, लेकिन पापी हमेशा अपने पाप के उजागर होने से डरता है। सरकार ने पहले इसका नाम बदला और फिर इसे पूरी तरह बैन कर दिया। लेकिन गुरुद्वारा नौवीं पातशाही और अन्य कमेटियों ने यह फैसला किया है कि सरकार की इस तानाशाही नीति को चलने नहीं दिया जाएगा। इस फिल्म को अब पंजाब के हर घर और हर गुरुद्वारे में दिखाकर सरकार की काली नीतियों को नंगा किया जाएगा।

जब उनसे सवाल किया गया कि इस फिल्म में केवल एक पक्ष दिखाया जा रहा है और भाई खालड़ा ने सिर्फ सिखों की बात की, जबकि उस दौर में बसों से निकालकर हिंदुओं को भी मारा गया था, तो कमेटी मेंबर ने स्पष्ट किया की खालड़ा एक महान और निष्पक्ष शख्सियत थे। उन्होंने केवल सिखों के लिए नहीं, बल्कि मानवाधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी। जब उन्होंने गांवों में जाकर लावारिस लाशों का रिकॉर्ड निकाला, तो उसमें केवल सिख ही नहीं, बल्कि कई हिंदू परिवारों के बच्चे भी शामिल थे।

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