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पंजाब सरकार पर कर्मचारियों का हल्ला बोल: नोटिफिकेशन जलाकर किया विरोध, बोले- सिर्फ पुराने हक मांग रहे हैं

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जालंधर– पंजाब सरकार के खिलाफ राज्यभर के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का गुस्सा एक बार फिर सामने आया है। सरकार द्वारा किए गए वादे पूरे न होने के विरोध में प्रदेशभर में कर्मचारियों और पेंशनर्स ने सरकारी नोटिफिकेशन की प्रतियां फूंककर उग्र प्रदर्शन किया।

यह विरोध प्रदर्शन पहले 17 तारीख को पूरे पंजाब में आयोजित किया जाना था, लेकिन प्रधानमंत्री के दौरे के मद्देनजर 20 तारीख कर दी गई। इस दौरान पूरे राज्य में कर्मचारियों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया। कर्मचारी नेताओं ने इसे पंजाब सरकार के लिए गंभीर चेतावनी बताते हुए आंदोलन तेज करने की बात कही है।

पढ़ें क्या कहा नेताओं ने:-

  • हमने कुछ नया नहीं मांगा, सरकार अपने वादे पूरे करे: प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे कर्मचारी नेताओं ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि वे सरकार से कोई नई मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि उन वादों को पूरा करने की मांग कर रहे हैं, जो वर्तमान सरकार ने सत्ता में आने से पहले किए थे। कर्मचारी नेताओं के अनुसार, सरकार ने वादा किया था कि सत्ता में आने के बाद पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल की जाएगी, ठेका प्रथा (कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम) को पूरी तरह खत्म किया जाएगा, पेंशनभोगियों को 2.59 का गुणांक दिया जाएगा, पे-कमिशन का बकाया एरियर जारी किया जाएगा और लंबित 18 प्रतिशत डीए (महंगाई भत्ता) दिया जाएगा।
  • सरकार ने किसी भी मांग को पूरा नहीं किया: नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने इनमें से किसी भी मांग को पूरा नहीं किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इन मांगों पर सरकार ने संज्ञान नहीं लिया तो आने वाले समय में इससे भी बड़े संघर्ष किए जाएंगे, जिसकी जिम्मेदारी पंजाब सरकार की होगी। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने “जनता का संघर्ष जिंदाबाद” और “मुलाजिम एकता जिंदाबाद” जैसे नारे लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया।
  • कमेटियों के नाम पर सिर्फ दिलासा और कोर्ट में झूठ: जब कर्मचारी नेताओं से पूछा गया कि पिछले दो वर्षों से धरना-प्रदर्शन करने के बावजूद उनकी मांगें पूरी क्यों नहीं हो रही हैं, तो उन्होंने सरकार पर तीखा हमला बोला। नेताओं ने कहा कि जिस भी सरकार ने कर्मचारियों से टकराव लिया है, वह दोबारा सत्ता में नहीं लौट पाई। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार को सत्ता में लाने में भी कर्मचारियों की अहम भूमिका रही है, लेकिन अब सरकार केवल कमेटियां बनाकर उन्हें आश्वासन दे रही है।
  • सरकार अदालत में गलत जानकारी दे रही: कर्मचारी नेताओं ने डीए (महंगाई भत्ता) के मुद्दे पर भी सरकार पर आरोप लगाए और कहा कि इस मामले में सरकार अदालत में गलत जानकारी दे रही है। उन्होंने सरकार की नीतियों पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए सवाल उठाया कि जब आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को केंद्र के समान डीए दिया जा रहा है, तो आम कर्मचारियों के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है।
  • टेबल टॉक करे सरकार, सिर्फ विज्ञापनों में हो रहा है काम: कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार का दावा है कि उसने अपने सभी वादे पूरे कर दिए हैं, तो वह कर्मचारियों के साथ बातचीत के लिए टेबल पर आए। शिक्षा विभाग का उदाहरण देते हुए नेताओं ने कहा कि विभाग में हुई अधिकांश भर्तियां पिछली सरकारों के कार्यकाल की हैं। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार द्वारा निकाली गई करीब 1100 भर्तियों की प्रक्रिया भी अभी अधर में लटकी हुई है।
  • सरकार के बड़े-बड़े विज्ञापन हर जगह दिखाई दे रहे: कर्मचारी नेताओं ने सरकार से सवाल किया कि वह बताए कि उसने कौन-कौन सी नई भर्तियां की हैं और कितने कच्चे कर्मचारियों को तय नियमों के तहत पक्का किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीनी स्तर पर काम नजर नहीं आ रहा, जबकि सरकार के बड़े-बड़े विज्ञापन हर जगह दिखाई दे रहे हैं।

2027 के चुनावों को लेकर बड़ी चेतावनी

साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर कर्मचारी नेताओं ने पंजाब सरकार को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मान को यह भ्रम दूर कर लेना चाहिए कि केवल मुफ्त योजनाओं के सहारे दोबारा सत्ता हासिल की जा सकती है।

कर्मचारी नेताओं ने दावा किया कि पंजाब में करीब 3.5 लाख सरकारी कर्मचारी हैं और यदि उनके परिवारों को भी शामिल किया जाए तो यह एक बड़ा वोट बैंक बनता है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी सरकार की रीढ़ की हड्डी होते हैं और उनके सहयोग के बिना शासन व्यवस्था सुचारू रूप से नहीं चल सकती। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया तो आने वाले समय में सरकार को इसके राजनीतिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

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