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पंजाब की सियासत में हलचल: अकाली दल (पुनर सुरजीत) से 15 नेताओं का इस्तीफा

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चंडीगढ़– शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) में बड़ा सियासी भूचाल आ गया है। पार्टी के 15 से अधिक नेताओं ने आज वरिष्ठ नेता इकबाल सिंह झूंदा के नेतृत्व में अलग गुट बनाने का ऐलान किया। उन्होंने सांसद अमृतपाल सिंह की पार्टी ‘वारिस पंजाब दे’ को समर्थन देने की भी घोषणा की। कार्यक्रम में अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह समेत कई नेता मौजूद रहे।

इस मौके पर नेताओं ने कहा कि संगठन में उन्हें जो भी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, उसका निर्वहन वे पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ करेंगे। बागी गुट ने कहा कि उनका उद्देश्य पंजाब, पंथ और किसानों के हितों के लिए कार्य करना है और वे इसी लक्ष्य के साथ आगे बढ़ेंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा अमृतपाल सिंह एनएसए हटा दिया गया है। वहीं, अब उन्हें सेशन में शामिल होने का मौका दिया जाए।

पढ़िए क्या बोले झूंदा: –

  • बड़ी ताकतें रोकने का प्रयास करती हैं: इकबाल सिंह झूंदा ने कहा कि जब भी किसी सिख नेता का उभार होता है, बड़ी ताकतें उसे रोकने का प्रयास करती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब के मुद्दों और यहां के लोगों के दर्द को न तो गंभीरता से समझा जा रहा है और न ही उनके समाधान के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।
  • छवि खराब करने की कोशिश की जा रही: झूंदा ने कहा कि इसके बजाय उभरते सिख नेतृत्व को कमजोर करने और उसकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे झूठी अफवाहों और भ्रामक प्रचार से बचें तथा पंजाब और पंथ के हित में एकजुट होकर काम करें।
  • बीबीएमबी में पंजाब की हिस्सेदारी कम की जा रही: झूंदा ने कहा कि आज पंजाब के अधिकारों में लगातार कटौती की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीबीएमबी में पंजाब की हिस्सेदारी कम की जा रही है और विश्वविद्यालयों में भी राज्य के अधिकार कमजोर हुए हैं। उन्होंने कहा कि जब पंजाब इन मुद्दों को उठाता है तो उसकी आवाज को अलग तरीके से पेश किया जाता है।
  • केंद्र सरकार से मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने की मांग: उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि सिखों से जुड़े मामलों, देश की राजधानी में सिख प्रतिनिधित्व, पंजाबी भाषी क्षेत्रों और पंजाब से संबंधित अन्य लंबित मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाए। साथ ही इनका संवैधानिक और राजनीतिक समाधान निकाला जाए।
  • सतलुज फिल्म ने पंजाब के दर्द को उजागर किया: झूंदा ने कहा कि सतलुज फिल्म ने पंजाब के एक बड़े दर्द और दुखद दौर को देश के सामने उजागर किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद अलग-अलग दलों की तीन सरकारें सत्ता में आईं, लेकिन किसी ने भी पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए। सरकार यह तक स्पष्ट नहीं कर पाई कि कितने लोगों का अंतिम संस्कार कहां किया गया, जबकि दूसरी सरकार ने आयोग गठित कर न्याय दिलाने का भरोसा दिया, लेकिन वह वादा भी पूरा नहीं हुआ।
  • अमृतपाल को सत्र में शामिल होने की अनुमति देने की मांग: झूंदा ने कहा कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में भी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई और कई आरोपी जेलों से बाहर आ चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाई अमृतपाल सिंह को इसलिए जेल में रखा गया है क्योंकि सरकार को किसी नए जन आंदोलन के उभरने का डर है। उन्होंने मांग की कि अमृतपाल सिंह को विधानसभा या संसदीय सत्र में शामिल होने की अनुमति दी जाए, ताकि वे जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा सकें।

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