पठानकोट– पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन ने सरकार पर परिवहन विभाग और कच्चे कर्मचारियों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया तो 3, 4 और 5 अगस्त को तीन दिवसीय पूर्ण हड़ताल (चक्का जाम) की जाएगी।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री के आवास का घेराव करने का भी ऐलान किया गया है। यूनियन ने विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान भूख हड़ताल करने का भी ऐलान किया है। सोमवार को पंजाब के सभी 27 डिपो के गेटों पर यूनियन की ओर से विरोध रैलियां आयोजित की गईं।
पठानकोट डिपो के गेट पर हुए प्रदर्शन के दौरान यूनियन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने सरकार की नीतियों और परिवहन विभाग में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ विरोध जताया।

यूनियन के आरोपों से गरमाई पंजाब की सियास: –
- सरकार के वादे निकले खोखले: पठानकोट में विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए संयुक्त सचिव विजय कुमार ने आरोप लगाया कि सत्ता में आने से पहले सरकार ने ठेकेदारी प्रथा खत्म करने और सभी कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने का वादा किया था। उन्होंने कहा कि चार साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक किसी भी कर्मचारी को नियमित नहीं किया गया। सरकार के साथ करीब 70 बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिले। कर्मचारियों को पक्का करने के लिए बनाई गई सब-कमेटी को भी चार साल हो चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदारी प्रथा के तहत कर्मचारियों के ईपीएफ और ईएसआई से जुड़े मामलों में करोड़ों रुपए का घोटाला किया गया है।
- 800 से ज्यादा बसें कंडम, स्पेयर पार्ट्स के अभाव में खड़ी हैं: यूनियन के डिपो संरक्षक दविंदर सिंह लाली ने विभाग की दयनीय स्थिति पर आंकड़े पेश करते हुए आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में करीब 800 बसें कंडम (खराब) हो चुकी हैं (अकेले पठानकोट डिपो की 25 के करीब बसें शामिल हैं), लेकिन सरकार ने एक भी नई सरकारी बस बेड़े में शामिल नहीं की। भीषण गर्मी के बावजूद स्पेयर पार्ट्स, टायर और बैटरियों के अभाव में विभाग की करीब 400 सामान्य बसें और 35 वोल्वो (Volvo) बसें डिपो में खड़ी कर रखी गई हैं।
- प्राइवेट बस घरानों को फायदा पहुंचाया जा रहा: सरकारी बसों को जानबूझकर खड़ा करके किलोमीटर स्कीम के तहत प्राइवेट बस घरानों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। टाइम-टेबल में भारी हेराफेरी कर विभाग को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया जा रहा है। मुख्य अधिकारियों की जगह सबसे जूनियर अधिकारियों को मुख्य सीटों पर बिठाया गया है जो कोई फैसला लेने में सक्षम नहीं हैं। इसके अलावा आउटसोर्स भर्तियों में भारी रिश्वतखोरी के सबूत होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।
- 10 दिन का दिया समय सीमा हुआ खत्म: यूनियन के जनरल सचिव जुगराज सिंह व सुखदेव सिंह ने बताया कि 24 जून की बैठक में सरकार ने 10 दिन का समय मांगा था और वादा किया था कि कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने का ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा। आउटसोर्स कर्मचारियों को कॉन्ट्रैक्ट पर लाने की समय सीमा 3 साल की जाएगी। सरकार ने अपना वादा पूरा नहीं किया। जगदीश्वर चंद्र ने कहा कि पंजाब सरकार के दावे चाहे जो भी हों, लेकिन आज पूरा पंजाब धरनों, प्रदर्शनों और हड़तालों का अखाड़ा बन चुका है। हर वर्ग सरकार से दुखी और निराश है।
अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
यूनियन नेताओं जोगिंदर पाल लवली और दिलबाग सिंह ने स्पष्ट किया कि 3, 4 और 5 अगस्त को पंजाब भर में तीन दिवसीय पूर्ण हड़ताल और चक्का जाम किया जाएगा। इस दौरान मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री के आवास के बाहर धरना देने के साथ ही विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान भूख हड़ताल भी की जाएगी।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार या प्रबंधन की ओर से कर्मचारियों के खिलाफ किसी तरह की दमनकारी कार्रवाई की गई तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल दिया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी पंजाब सरकार और ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट की होगी।








