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पटियाला में राजा वड़िंग के सामने बगावत : ‘चन्नी लियाओ-कांग्रेस बचाओ’ के नारों से गूंजा कार्यक्रम

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जालंधर/पटियाला- पंजाब कांग्रेस में पूर्व CM चरणजीत चन्नी और प्रदेश प्रधान अमरिंदर राजा वड़िंग के बीच की गुटबाजी अब वर्करों में भी पहुंच गई है। शनिवार को पटियाला के समाना में कार्यक्रम के दौरान चन्नी समर्थकों ने राजा वड़िंग का विरोध कर दिया। उन्होंने वड़िंग की हूटिंग करते हुए चन्नी के समर्थन में जमकर नारेबाजी की।

यहां राजा वड़िंग ने जैसे ही बोलना शुरू किया तो समर्थकों ने चन्नी के हक में नारेबाजी शुरू कर दी। उन्होंने ‘चन्नी लियाओ-पंजाब बचाओ’, ‘चन्नी लियाओ-कांग्रेस बचाओ’ के नारे लगाए। इससे राजा वड़िंग भड़क गए, उन्होंने पूछा कि क्यों नारे लगा रहे हो। जिसने पार्टी का प्रोग्राम खराब किया, उसके खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई होगी।

नारेबाजी करते चरणजीत चन्नी समर्थकों को चेतावनी देते राजा वड़िंग।
नारेबाजी करते चरणजीत चन्नी समर्थकों को चेतावनी देते राजा वड़िंग।

चन्नी ने प्रभारी के दौरे का बायकॉट किया

पूर्व CM चरणजीत चन्नी ने प्रभारी भूपेश बघेल के दौरे का बायकॉट कर रखा है। पंजाब में बूथ मजबूत करने की ये मुहिम प्रधान राजा वड़िंग की अगुआई में चलाई जा रही है। जिस वजह से चन्नी और उनके साथ चल रहे सांसद सुखजिंदर रंधावा भी इस मुहिम से दूर हैं। कल शुक्रवार को भी फतेहगढ़ साहिब में हुए कार्यक्रम में चन्नी नहीं पहुंचे थे। यहां सिर्फ राजा वड़िंग व उनके गुट के नेता ही मौजूद थे। यहां प्रधान राजा वड़िंग ने दावा किया था कि AAP के 6 सांसदों के बाद अब 40 से 45 विधायक भी पार्टी छोड़ सकते हैं, उन्हें लग रहा है कि 2027 के चुनाव में उनकी टिकट काटी जा सकती है। इस बारे में सीक्रेट मीटिंग भी हो चुकी है।

चन्नी और वड़िंग में CM फेस और वर्चस्व की लड़ाई

राजा वड़िंग को दोबारा पंजाब कांग्रेस की कमान सौंपे जाने के बाद से पंजाब कांग्रेस की अंतरकलह सार्वजनिक मंचों पर सामने आई। पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक नेताओं का मानना है कि पंजाब में लगभग 32 फीसदी दलित आबादी को ध्यान में रखते हुए पार्टी को आगामी चुनावों से पहले मुख्यमंत्री के चेहरे या मजबूत नेतृत्व को लेकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। हाल ही में बंद कमरे में भूपेश बघेल के साथ हुई बैठकों के बाद चन्नी के बयानों ने इस गुटबाजी को और सार्वजनिक कर दिया।

दूसरी ओर, आक्रामक शैली और युवाओं में पकड़ रखने वाले राजा वड़िंग का तर्क है कि पार्टी आलाकमान का निर्णय सर्वोपरि है। उन्होंने हालिया बयानों में यह स्पष्ट किया कि यदि आलाकमान कल उन्हें पद से हटा भी दे या टिकट न दे, तब भी वे सच्चे सिपाही की तरह कांग्रेस के साथ रहेंगे।

प्रभारी बघेल का बूथ अभियान के बहाने मिशन पैचअप

पंजाब कांग्रेस की गुटबाजी को दूर करने के लिए प्रभारी भूपेश बघेल ने चंडीगढ़ और फतेहगढ़ साहिब का लगातार दौरा कर सीनियर नेताओं के साथ मैराथन मीटिंग्स की हैं। बघेल ने चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रताप सिंह बाजवा और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ वन टू वन भी बात की। मिशन पैचअप से इनकार करते हुए बघेल ने गुटबाजी पर कहा कि विचार-विमर्श लोकतंत्र का हिस्सा है। पंजाब में कांग्रेस एकजुट होकर लड़ेगी और पार्टी का मुख्य चेहरा राहुल गांधी रहेंगे।

जानें ‘हर बूथ कांग्रेस मजबूत’ से पार्टी को क्या फायदा

  • निराश हो चुके काडर का पुनर्गठन: सूबा स्तर के नेताओं की आपसी जंग से नीचे का कार्यकर्ता हताश न हो, इसके लिए पार्टी सीधे ब्लॉक और बूथ स्तर के पदाधिकारियों से संवाद साध रही है। भूपेश बघेल पंजाब में इस बार 2 पार्टियों नहीं बल्कि 5 पार्टियों के बीच मुकाबला मान रहे हैं। फतेहगढ़ साहिब की मीटिंग में बघेल ने कहा कि अगर कांग्रेस का कार्यकर्ता बूथ पर रहेगा तो उनको पीएम नरेंद्र मोदी या होम मिनिस्टर अमित शाह खुद भी नहीं हरा सकते।
  • गुटबाजी से ध्यान हटाकर ग्राउंड कनेक्ट बढ़ाना: पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल्स और आधिकारिक मंचों के जरिए संदेश दिया जा रहा है कि नेताओं से बड़ा संगठन है। बूथ-स्तर पर मजबूती से नेताओं की आपसी खींचतान का असर कार्यकर्ताओं के मनोबल पर कम पड़ेगा। मंच से कांग्रेस प्रधान राजा वड़िंग ने साफ कर दिया कि 2027 का चुनाव बड़े मंचों से नहीं बल्कि बूथ और मोबाइल पर लड़ा जाएगा।
  • सत्तारूढ़ AAP और BJP को चुनौती: पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के खिलाफ बन रहे माहौल (नशा, कानून-व्यवस्था, गैंगस्टर नेटवर्क) को सीधे बूथ स्तर पर भुनाने के लिए कांग्रेस इस अभियान को धार दे रही है। इसके साथ ही भाजपा पहले ही डेरों और बूथ लेवल पर माइक्रोमैनेजमेंट कर रही है। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी में बीते 5 साल में हर जिले में अपने प्रभारी लगाए हैं। कांग्रेस ने गुटबाजी से ध्यान हटाने और इन सबकी काट के लिए ही थी हर बूथ मजबूत अभियान लांच किया है।
  • अनुशासन का कड़ा संदेश: अभियान के दौरान आजाद चुनाव लड़ चुके कई कांग्रेस नेताओं को शामिल नहीं किया गया है। इनमें पूर्व सीएम चरनजीत चन्नी के भाई डॉ. मनोहर सिंह भी शामिल हैं। डॉ. मनोहर को न बुलाने के सवाल पर बघेल ने कहा कि कहा कि जो लोग कांग्रेस का हिस्सा नहीं हैं, उन्हें बैठक में नहीं बुलाया गया। ऐसे करके पार्टी ने यूथ को संदेश दिया है कि जो पार्टी लाइन से अलग चलेगा वह हमेशा पार्टी से दूर हो जाएगा। पुराने नेताओं के जरिए नए और मौजूदा नेताओं को अनुशासन का भी कड़ा संदेश दिया जा रहा है।

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