#WATCH | Sirsa, Haryana: Rape convict Dera Sacha Sauda chief Gurmeet Ram Rahim Singh arrived at the Dera headquarters in Sirsa from Sunaria Jail after being granted 21-day parole pic.twitter.com/Q7WKr98dvG
— ANI (@ANI) August 25, 2026
रोहतक- अपनी दो महिला शिष्यों के साथ दुष्कर्म के मामले में 20 साल की सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर जेल से बाहर आने का मौका मिल गया है। उन्हें 21 दिन की फरलो (Furlough) दी गई है। साल 2017 में दोषी ठहराए जाने के बाद से उनकी यह कुल 17वीं अस्थायी रिहाई है। मंगलवार सुबह वह हरियाणा के रोहतक स्थित हाई-सिक्योरिटी सुनारिया जेल से बाहर आए और अपनी इस फरलो की अवधि के दौरान वह सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय में ही निवास करेंगे।
यह ताजा रिहाई मई महीने में मिली 30 दिन की पैरोल पूरी होने के बाद जेल लौटने के दो महीने से भी कम समय के भीतर हुई है। इस साल यह उनकी तीसरी अस्थायी रिहाई है। इससे पहले उन्हें जनवरी में 40 दिन की पैरोल और मई में 30 दिन की पैरोल मिल चुकी थी।
दुष्कर्म मामले में 20 साल की सजा
पंचकूला की एक विशेष सीबीआई अदालत ने अगस्त 2017 में राम रहीम को दो महिला अनुयायियों से दुष्कर्म का दोषी करार देते हुए 20 साल के कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद से उन्हें रोहतक की सुनारिया जेल में बंद रखा गया था। उनके दोषी ठहराए जाने के बाद पंचकूला और सिरसा में उनके समर्थकों ने भारी हिंसा की थी, और उस दौरान हुए संघर्षों में 40 से अधिक लोगों की जान चली गई थी।
डेरा प्रमुख को अलग-अलग हत्या के मामलों में भी सजा सुनाई गई थी, हालांकि बाद में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने उन्हें साल 2002 में डेरा के पूर्व प्रबंधक रंजीत सिंह की हत्या और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड मामले में बरी कर दिया था।
2017 से अब तक मिल चुकी हैं 17 बार पैरोल-फरलो
राम रहीम की यह ताजा फरलो उन अस्थायी रिहाइयों की लंबी सूची में शामिल है, जो उन्हें तब से मिल रही हैं जब वे इसके पात्र हुए थे। उनकी इन रिहाइयों (पैरोल और फरलो) की अवधि कुछ घंटों से लेकर 50 दिनों तक की रही है। उनकी पहली अस्थायी रिहाई अक्टूबर 2020 में हुई थी, जिसके बाद मई 2021 में उन्हें फिर राहत मिली। इसके बाद साल 2022, 2023, 2024 और 2025 में भी उन्हें लगातार पैरोल और फरलो मिलती रही।
अकेले 2025 की बात करें तो उन्हें जनवरी में 30 दिन की पैरोल, अप्रैल में 21 दिन की फरलो और अगस्त में 40 दिन की पैरोल दी गई थी। वहीं, साल 2026 में जनवरी के महीने में उन्हें 40 दिन की पैरोल मिली थी, जिसके बाद मई में 30 दिन की पैरोल दी गई। अब यह 21 दिन की फरलो उनकी सजा के बाद से 17वीं अस्थायी रिहाई है।
बार-बार मिलने वाली रिहाई पर उठते रहे हैं सवाल
राम रहीम को बार-बार मिलने वाली पैरोल और फरलो पर अक्सर राजनीतिक विवाद खड़ा होता रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि इनमें से कई रिहाइयां उन राज्यों में चुनावों के आसपास होती हैं जहां डेरा का अच्छा खासा प्रभाव माना जाता है। उदाहरण के लिए, जनवरी 2025 में मिली 30 दिन की पैरोल दिल्ली विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आई थी, जबकि अक्टूबर 2024 की 20 दिन की पैरोल हरियाणा विधानसभा चुनावों के ठीक पहले दी गई थी।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) सहित कई सिख संगठनों ने डेरा प्रमुख को बार-बार दी जाने वाली अस्थायी रिहाइयों की तीखी आलोचना की है। हरियाणा, पंजाब और राजस्थान समेत कई राज्यों में डेरा का मजबूत जनाधार है और हरियाणा के कई जिलों में उनके समर्थकों की संख्या काफी अधिक है।
हरियाणा जेल नियमों के तहत क्या हैं प्रावधान?
हरियाणा के जेल नियमों के अनुसार, पैरोल और फरलो अस्थायी रिहाई के दो अलग-अलग रूप हैं, जिनकी पात्रता और शर्तें अलग-अलग होती हैं। आमतौर पर फरलो को सजा की अवधि का हिस्सा माना जाता है, जबकि पैरोल के दौरान जेल से बाहर बिताए गए समय को कुल सजा में आगे जोड़ दिया जाता है।







