जालंधर- जालंधर से कांग्रेस सांसद और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी और आम आदमी पार्टी सरकार पर जमकर निशाना साधा। चन्नी ने कहा कि राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रामलीला मैदान रैली के बाद मंच का शुद्धिकरण किए जाने की घटना मनुवादी सोच को दर्शाती है।
चन्नी ने आरोप लगाया कि बीजेपी लगातार दलितों, आदिवासियों, गरीबों और पिछड़े वर्गों को निशाना बना रही है। उन्होंने मांग की कि राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR को तुरंत वापस लिया जाए।
सोशल मीडिया पर AI के दुरुपयोग और फेक वीडियो के मुद्दे पर चन्नी ने कहा कि किसी भी नेता का गलत वीडियो बनाकर उसकी मर्यादा को ठेस पहुंचाना पूरी तरह गलत है। कांग्रेस इसका पुरजोर विरोध करती है। हालांकि, उन्होंने कहा कि असली और सच्चे वीडियो को भी लैब में भेजकर गलत साबित करने का प्रयास करना उतना ही गलत है।

जानें चन्नी ने क्या कहा…
- अस्पताल में ऑक्सीजन बंद होने से हो रही मौतें– जालंधर के अस्पताल में कथित तौर पर ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने से तीन मरीजों की मौत हो गई। सरकार ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और पोस्टमार्टम कराने के बजाय इसे सीधे हार्ट अटैक बताकर रिपोर्ट दबा दी। स्वास्थ्य क्रांति के दावों के बीच इस लापरवाही पर अब तक किसी भी जिम्मेदार के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है।
- केंद्रीय फंड का बिजली बिल में दुरुपयोग किया जा रहा- पंजाब की पूर्व कांग्रेस सरकार ने गांवों की पानी की टंकियों और मोटरों के पुराने बिजली बिल माफ कर दिए थे। मौजूदा ‘आप’ सरकार ने 15वें वित्त आयोग से मिले ₹542 करोड़ के केंद्रीय फंड को बिजली बोर्ड को दे दिया। यह पैसा गांवों की जल निकासी और विकास पर खर्च होना था, जिसे सरकार ने अवैध रूप से इस्तेमाल कर लिया।
- आयुष्मान योजना के पैसों में हो रहा फर्जीवाड़ा- केंद्र सरकार की आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना का पैसा केवल सरकारी अस्पतालों को दिया जा रहा है, जबकि नियमानुसार इसे प्राइवेट अस्पतालों को भी मिलना चाहिए। 16,730 क्लेम में से 15,400 से ज्यादा क्लेम सरकारी अस्पतालों को दे दिए गए। बकाए का भुगतान न होने से प्राइवेट अस्पतालों ने बीमा योजना के तहत मरीजों का इलाज बंद कर दिया है।
- सरकारी स्कूलों में बच्चों को सुविधाएं नहीं मिल रहीं- गुजरात के लोगों को केजरीवाल के वादों और विज्ञापनों में नहीं आना चाहिए। पंजाब के सरकारी स्कूलों में बच्चों के पास बैठने के लिए बेंच, पीने का पानी, शौचालय, यूनिफॉर्म और यहां तक कि शिक्षक भी नहीं हैं। केंद्र से आने वाले फंड के बावजूद गरीब बच्चों को प्राथमिक सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं और कई स्कूल सिंगल टीचर के भरोसे चल रहे हैं।
- अफसरों पर दबाव और रिपोर्ट छिपाने का आरोप- मीटिंग में अधिकारी सही आंकड़े और रिपोर्ट देने से डरते दिखे। जब उन्हें सख्त चेतावनी दी गई, तब जाकर स्कूलों और शिक्षा विभाग का असली सच बाहर आया। अधिकारी अपनी कुर्सियों पर बैठकर गरीब बच्चों का हक मार रहे हैं। स्थिति यह है कि कई स्कूलों में शिक्षकों और मिड-डे मील की स्थिति बेहद खराब बनी हुई है।
- कांग्रेस शासन के प्रोजेक्ट्स पर अपना नाम लिखवा रहे- कांग्रेस सरकार के दौरान खरड़ में 12 करोड़ की लागत से शानदार मॉडल स्कूल और दो एसी स्कूल बनाए गए थे। आप सरकार ने साढ़े चार साल में इन स्कूलों का फर्नीचर तक नहीं खरीदा और बच्चों को हैंडओवर नहीं किया। अब सरकार सिर्फ नाम बदलकर ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ का बोर्ड लगाकर दूसरों के कामों का श्रेय लेने में लगी है।








