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धर्म परिवर्तन और विदेशी फंडिंग मामले में घिरे पास्टर अंकुर नरूला, हाईकोर्ट ने केंद्र व पंजाब सरकार से मांगा जवाब

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अंकुर नरुला के फाइल फोटो।

जालंधर-  जालंधर के चर्चित पास्टर अंकुर नरूला और उनकी संस्था ‘चर्च ऑफ साइन एंड वंडर्स’ के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। तेजस्वी मिन्हास द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र और पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

याचिका में पास्टर पर चमत्कारी इलाज के नाम पर धर्म परिवर्तन कराने, विदेशी चंदे (FCRA) के नियमों का उल्लंघन करने और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

हाईकोर्ट की कार्रवाई और मुख्य आरोप

चीफ जस्टिस शील नागू की खंडपीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता के वकील विशाल गर्ग नरवाना ने अदालत में दलील दी कि पास्टर अंकुर नरूला और उनकी पत्नी सोनिया नरूला ‘अभिषेक तेल’ और ‘चमत्कारी उपचार’ के बहाने गरीब और भोले-भाले लोगों को गुमराह कर रहे हैं।

विदेशी कनेक्शन और वीजा नियमों का उल्लंघन

याचिका में एक बड़ा खुलासा यह भी किया गया है कि अंकुर नरूला की कार्यप्रणाली नाइजीरिया के विवादित प्रचारक टीबी जोशुआ से प्रेरित है। आरोप है कि विदेशी मिशनरियों को ‘टूरिस्ट वीज़ा’ पर भारत बुलाकर उनसे धार्मिक गतिविधियां करवाई जा रही हैं, जो विदेशी अधिनियम, 1946 के विरुद्ध है।

फंडिंग और टैक्स चोरी की आशंका

संस्था की आर्थिक गतिविधियों पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिका के अनुसार संस्था को बिना वैध FCRA रजिस्ट्रेशन के विदेशी चंदा मिल रहा है। चर्च परिसर में घड़ियों और ‘अभिषेक तेल’ की बिक्री बिना किसी GST बिल के की जा रही है।

चर्च के निर्माण को भी चुनौती

प्रशासनिक स्तर पर 12 जनवरी को शिकायत करने के बावजूद जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो मामला हाईकोर्ट पहुंचा। याचिका में खांबड़ा गांव में बने विशाल चर्च भवन के निर्माण की वैधता को भी चुनौती दी गई है। अब इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान सरकारों को अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा।

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