अमृतसर- अमृतसर में गुरुवार को सीएम भगवंत मान की “शुकराना यात्रा” के दौरान खडूर साहिब से सांसद व खालिस्तानी समर्थक अमृतपाल सिंह की मां ने उसने सवाल पूछे। सांसद की मां बलविंदर कौर ने सीएम को दो-तीन बार आवाज लगाई। जब सीएम का ध्यान बलविंदर कौर की ओर गया, तो उन्होंने गाड़ी से नीचे झुककर उनकी बात सुनने की कोशिश की।
तभी बलविंदर कौर ने कहा- मैं अमृतपाल की मां हूं। सीएम साहब, आप भी किसी मां के बेटे हैं, मेरे बेटे की NSA हटने के बाद भी उसे पंजाब क्यों नहीं लाया जा रहा?इतने में सीएम हाथ छुड़वाते हुए पीछे हट गए
इस दौरान अमृतपाल समर्थकों ने सीएम के खिलाफ नारेबाजी भी की और मुर्दाबाद के नारे लगाए। हालांकि, सीएम मान अपने तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ गए और यात्रा जारी रखी।
अमृतपाल सिंह फिलहाल असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद है। उन पर लगा NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) 22 अप्रैल को खत्म हो चुका है। इसके बावजूद वह जेल में हैं, क्योंकि उनके खिलाफ अन्य मामले अभी भी चल रहे हैं।

अजनाला हिंसा केस अभी जारी
अमृतपाल सिंह पर फरवरी 2023 में अजनाला पुलिस थाने में हुए हमले का केस दर्ज है। आरोप है कि वह अपने समर्थकों के साथ थाने पहुंचे थे और एक साथी को छुड़ाने की कोशिश की थी। इस मामले में हत्या के प्रयास (धारा 307) समेत कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
पुलिस ने इस केस में अमृतपाल सिंह और उनके 41 साथियों को आरोपी बनाया है। हाल ही में उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अजनाला कोर्ट में पेश किया गया था, जहां अदालत ने उन्हें 30 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए थे।
पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार से मांग की है कि अमृतपाल सिंह को असम की डिब्रूगढ़ जेल में ही रखा जाए। सरकार का कहना है कि उन्हें पंजाब लाने से राज्य में कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है, इसलिए सुरक्षा कारणों से यह जरूरी है।
अमृतपाल ने जेल में रहकर चुनाव जीता था
अमृतपाल सिंह ने जेल में रहते हुए 2024 में पंजाब की खडूर साहिब लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा। उनके पास किसी तरह का कैडर या पार्टी का भी सहारा नहीं था। अमृतपाल ने खुद प्रचार तक नहीं किया। इसके बावजूद वह 1.79 लाख वोटों चुनाव जीते। पंजाब के 13 लोकसभा क्षेत्रों में जीत का यह सबसे बड़ा अंतर था।
परिवार के अनुसार, अमृतपाल को जेल से बाहर लाने के लिए संगत ने फैसला लिया था कि उन्हें लोकसभा चुनाव 2024 लड़वाया जाए। अमृतपाल इसके लिए राजी नहीं थे, तब माता-पिता और वकील ने जेल में जाकर उन्हें मनाया। चुनाव का कैंपेन भी पिता तरसेम सिंह ने ही संभाला था।








