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पंजाब सरकार को हाईकोर्ट में झटका : प्राइवेट स्कूलों से 3 साल की फीस वसूली पर रोक ; याचिकाकर्ताओं को मिली राहत

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लुधियाना-  पंजाब सरकार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। राज्य सरकार ने प्राइवेट स्कूलों द्वारा 5 प्रतिशत से अधिक बढ़ाई गई फीस को अभिभावकों (पेरेंट्स) को वापस करने का नोटिफिकेशन जारी किया था, उस पर अस्थायी रोक लगाने का दावा प्राइवेट स्कूल संचालक कर रहे हैं।

सरकार ने हाल ही में एक अध्यादेश जारी किया था। इसके तहत प्राइवेट स्कूलों पर शिकंजा कसने की बात कही गई थी। सरकार ने साफ कर दिया था कि अगर किसी भी संस्थान ने पिछले 3 साल में 5 फीसदी से ज्यादा फीस बढ़ाई है तो उन्हें वह वापस करनी होगी।

पंजाब सरकार के इस फैसले के खिलाफ प्राइवेट स्कूल संचालकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिका दायर करने वाले ‘रिकोग्नाइज्ड एंड एफिलिएटेड स्कूल एसोसिएशन’ के अध्यक्ष हरपाल सिंह यूके का दावा है कि अदालत ने सरकार के इस आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है।

अब इस मामले में अगली सुनवाई होगी और कोर्ट का अंतिम फैसला ही सभी स्कूल संचालकों पर लागू होगा। हरपाल सिंह यूके ने कहा कि अभी इस मामले का ऑर्डर अदालत की तरफ से अपलोड नहीं किया गया है। उनका कहना है कि शाम तक ऑर्डर अपलोड हो जाएगा।

पंजाब सरकार के प्राइवेट स्कूल फीस अध्यादेश के प्रमुख प्रावधान

  • फीस बढ़ोतरी की सीमा तय: निजी (अनएडेड) स्कूल एक शैक्षणिक सत्र में अधिकतम 5% तक ही फीस बढ़ा सकेंगे। 5% से अधिक फीस बढ़ाने के लिए संबंधित जिला रेगुलेटरी बॉडी से पूर्व लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
  • अधिक वसूली गई फीस लौटानी होगी: यदि किसी स्कूल ने पिछले 3 वर्षों में कुल मिलाकर 15% से अधिक फीस बढ़ाई है, तो अतिरिक्त वसूली गई राशि अभिभावकों को वापस (Refund) करनी होगी। ट्यूशन फीस के साथ-साथ वार्षिक शुल्क, बिल्डिंग फंड, लैब फीस, लाइब्रेरी फीस, स्मार्ट क्लास शुल्क, परीक्षा शुल्क और अन्य सभी अनिवार्य शुल्क कुल फीस का हिस्सा माने जाएंगे।
  • अलग-अलग नाम से अतिरिक्त वसूली पर रोक: स्कूल अलग-अलग मदों (Heads) के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूल कर निर्धारित फीस सीमा से बच नहीं सकेंगे। सभी निजी स्कूलों को अपने पिछले चार वर्षों की फीस का रिकॉर्ड सरकारी ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना होगा।
  • फोरेंसिक ऑडिट का प्रावधान: शिकायत मिलने या आवश्यकता पड़ने पर जिला रेगुलेटरी बॉडी स्कूल के वित्तीय खातों का फोरेंसिक ऑडिट करा सकेगी। जरूरत पड़ने पर स्कूल का संचालन करने वाली सोसायटी या ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकेगी।
  • फीस का सार्वजनिक खुलासा: स्कूलों को अपनी फीस संरचना का पूरा विवरण अपनी वेबसाइट और स्कूल परिसर के नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करना होगा। नियमों का पहली बार उल्लंघन करने पर ₹50,000 और दूसरी बार उल्लंघन करने पर ₹1 लाख तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
  • मान्यता रद्द करने का प्रावधान: बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों की एनओसी (NOC), मान्यता या संबद्धता (Affiliation) रद की जा सकती है।
  • किन स्कूलों पर लागू होगा: यह अध्यादेश पंजाब के सभी अनएडेड (निजी) स्कूलों पर लागू होगा, चाहे वे CBSE, ICSE या PSEB बोर्ड से संबद्ध हों।

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