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लैंड पूलिंग पॉलिसी पर पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, आखिर क्या है वजह….?

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चंडीगढ़ । पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने लैंड पूलिंग नीति को वापस न लेने पर अड़ी पंजाब सरकार को फटकारते हुए इसपर 10 सितंबर तक रोक लगा दी है। लुधियाना निवासी गुरदीप सिंह गिल ने याचिका दाखिल करते हुए बताया कि अधिसूचित लैंड पूलिंग नीति-2025 के अनुसार लुधियाना जिले में लगभग 26,000 एकड़ से अधिक भूमि आवासीय और वाणिज्यिक परियोजनाओं के लिए अधिसूचित की गई है।

याचिकाकर्ता 6 एकड़ ज़मीन का मालिक है, जो उसके पिता को पाकिस्तान के लायलपुर ज़िले में उनकी ज़मीन के बदले विस्थापित व्यक्ति के रूप में आवंटित की गई थी। याची ने बताया कि यह नीति छोटे भूस्वामियों के साथ भेदभावपूर्ण है क्योंकि जो लोग लैंड पूलिंग के लिए 9 एकड़ ज़मीन की पेशकश करेंगे, उन्हें ग्रुप हाउसिंग के लिए 3 एकड़ ज़मीन दी जाएगी, जबकि जो 50 एकड़ ज़मीन की पेशकश करेंगे, उन्हें प्लॉटिंग के विकास के लिए 30 एकड़ ज़मीन वापस की जाएगी, जबकि याचिकाकर्ता के पास 6 एकड़ ज़मीन है और बदले में उन्हें केवल एक एकड़ ज़मीन दी जाएगी।

निजी बिल्डर को नहीं सौंपी जाएगी जमीन

सरकार ने कहा कि लैंड पूलिंग नीति का उद्देश्य नियोजित और सतत शहरी विकास परियोजनाओं को बढ़ावा देना और अवैध कॉलोनियों के प्रसार को रोकना है। सरकार ने तर्क दिया कि इस माध्यम से अवैध कालोनियों को रोका जा सकेगा नहीं तो राज्य झुग्गी में बदल जाएगा। पंजाब सरकर ने कोर्ट को विश्वास दिलाया कि परियोजनाओं को विकास के लिए किसी भी निजी बिल्डर को नहीं सौंपा जाएगा। याची ने आरोप लगाया कि यह नीति एक भूमि हड़पने की योजना है जो किसानों को विस्थापित कर सकती है और कृषि पद्धतियों को प्रभावित कर सकती है।

आजीविका विहीन हो सकते हैं सैकड़ों लोग

जस्टिस अनुपिंदर ग्रेवाल और जस्टिस दीपक मनचंदा की पीठ ने उन किसानों, ग्रामीण कारीगरों और भूमि मालिकों के प्रति चिंता व्यक्त की, जो इस परियोजना के कारण भूमिहीन व आजीविका विहीन हो सकते हैं। न्यायालय ने परियोजना के पूरा होने की समय-सीमा के अभाव पर भी ध्यान दिलाया और इस बात पर ज़ोर दिया कि पीड़ित व्यक्तियों के लिए कोई निवारण तंत्र मौजूद नहीं है। अदालत ने अधिग्रहित की जाने वाली भूमि की पहचान करने से पहले अनिवार्य सामाजिक प्रभाव आकलन न कराने पर भी सरकार पर सवाल उठाया।

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