ज्योतिषाचार्य राकेश जैन स्वर्ण पदक विजेता जालंधर ने बताया कि 15 जून 2026 को अधिकमास की सोमवती अमावस्या है। अधिकमास में अमावस्या अगर सोमवार को आती है तो इसे पुराणों में सबसे श्रेष्ठ दिन माना जाता है। 30 साल बाद अधिकमास की अमावस्या सोमवार के दिन आई है। इससे पहले ये संयोग जुलाई 1996 में बना था।
अधिकमास श्रीहरि विष्णु और सोमवती अमावस्या शिव जी, पितरों को समर्पित है। इस दिन किया गया तप-जप, दान समस्त धार्मिक कार्य व्यक्ति को भवसागर से तार लगा देने में सहायक होता है.।यही वजह है कि 30 साल बाद आई ये अधिकमास की सोमवती अमावस्या तिथि अत्यंत लाभदायी है, इसे सोने पर सुहागा जैसा दिन माना जा रहा है. इस दिन कुछ खास उपाय आपके जीवन में अनेकों बदलाव ला सकते है
अधिकमास सोमवती अमावस्या 2026 संयोग
ज्योतिषाचार्य राकेश जैन स्वर्ण पदक विजेता जालंधर ने बताया पंचांग के अनुसार 15 जून के सोमवती अमावस्या के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का भी निर्माण हो रहा है जिसे बेहद ही शुभ माना जाता है। इस योग किए गए कार्य सफल होते हैं।
इसके अलावा ग्रहों का आशीर्वाद भी मिलेगा क्योंकि अधिकमास सोमवती अमावस्या पर चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में स्थित रहेंगे। बुध ग्रह अपनी स्वराशि मिथुन में रहेंगे, गुरु कर्क राशि में स्थित रहेंगे और मंगल ग्रह मेष राशि में विद्यमान रहेंगे।
अधिकमास सोमवती अमावस्या के महाउपाय
ज्योतिषाचार्य राकेश जैन स्वर्ण पदक विजेता जालंधर ने बताया कि ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या का दिन कुछ विशेष उपायों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन मां दुर्गा की आराधना करने से राहु और केतु से जुड़े नकारात्मक प्रभावों को शांत करने में मदद मिलती है। राहु-केतु को छाया ग्रह माना गया है और देवी दुर्गा को शास्त्रों में छाया स्वरूप की अधिष्ठात्री शक्ति बताया गया है। ऐसे में उनकी श्रद्धापूर्वक पूजा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक संतुलन लाने वाली मानी जाती है। इस दिन विवाहित महिलाएं परिवार की खुशहाली, समृद्धि और प्रियजनों की दीर्घायु की कामना के साथ पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमा करती हैं। मान्यता है कि यह साधना पारिवारिक सुख और सौभाग्य को मजबूत करने का प्रतीक होती है।
कालसर्प दोष छिन लेता है खुशियां – जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष माना जाता है। उनके जीवन में करियर, व्यापार और वैवाहिक मामलों में रुकावटें देखने को मिल सकती हैं। कई बार मन में भय, अस्थिरता या बार-बार सांप से जुड़े सपनों का अनुभव भी बताया जाता है। ऐसी स्थिति में रुद्राभिषेक को एक प्रमुख उपाय माना गया है और सोमवती अमावस्या इस पूजा के लिए विशेष फलदायी मानी जाती है।
मन की स्थिरता दिलाई संतुलन- अमावस्या तिथि पर चंद्रमा दिखाई नहीं देता। ज्योतिष में चंद्रमा को मन और भावनाओं का कारक माना गया है, इसलिए इस दिन भगवान शिव को चावल, चीनी, दूध या अन्य सफेद वस्तुएं अर्पित करना चाहिए। ये मन की शांति, सकारात्मक सोच और जीवन में संतुलन बनाए रखने का प्रतीक माना जाता है।








