पठानकोट – पठानकोट नगर निगम चुनाव को संपन्न हुए 15 दिन बीतने के बावजूद शहर को मेयर नहीं मिल सका है। वजह है, पठानकोट निगम में किसी भी राजनीतिक पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। जिसके चलते मेयर की कुर्सी हासिल करने के लिए कांग्रेस, भाजपा और आम आदमी पार्टी (आप) के बीच पर्दे के पीछे से अलग-अलग राजनीतिक जोड़-तोड़ तेज हो गई है।
भाजपा भले ही 50 में से 22 सीटें जीतने के बाद सबसे बड़ी पार्टी बनी और कांग्रेस भी 18 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रही। लेकिन, दिलचस्प बात ये है कि इस चुनाव में सबसे कम महज 10 सीटें जीतने वाली आप किंग मेकर की भूमिका में है।
ये बात स्पष्ट है कि आप के पार्षदों को तोड़े बिना भाजपा या कांग्रेस मेयर की कुर्सी तक पहुंचने में सफल नहीं हो सकती। ऐसे में तीनों पार्टियों में घमासान जारी है।
पठानकोट में जनरल वर्ग से होगा मेयर
पंजाब सरकार की ओर से राज्य के 8 नगर निगमों के मेयर पद के लिए रिजर्वेशन रोस्टर जारी कर दिया गया है। नई अधिसूचना के तहत पठानकोट नगर निगम में मेयर का पद ‘जनरल’ (सामान्य श्रेणी) रखा गया है।
किसी भी सियासी दल के पास 26 सीटें नहीं
पठानकोट निगम के चुनावी गणित पर नजर डालें तो कुल 50 वार्डों में से 22 वार्ड जीतकर भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि, बहुमत के जादुई आंकड़े (26 सीटें) को छूने के लिए भाजपा को अभी भी 3 और पार्षदों के समर्थन की जरूरत है।
कांग्रेस-AAP में ‘पॉवर शेयरिंग’ फॉर्मूला और BJP की रणनीति
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस और ‘आप’ के बीच गठबंधन की सूरत में मेयर पद कांग्रेस को और सीनियर डिप्टी मेयर तथा डिप्टी मेयर का पद आम आदमी पार्टी को दिए जाने पर सहमति बन सकती है। इसके पीछे ‘आप’ की रणनीति आगामी विधानसभा चुनावों तक स्थानीय स्तर पर अपने जनाधार को मजबूत बनाए रखने की है।
भाजपा भी लगा सकती है आप-कांग्रेस के खेमे में सेंध
अंदरखाने से खबर है कि भाजपा ने भी अन्य पार्षदों से संपर्क साधा है। उन्हें हाउस में सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पदों के ऑफर देकर अपने पाले में लाने की पुरजोर कोशिशें की जा रही हैं। उधर, पंजाब सरकार आगामी विधानसभा चुनाव तक राज्य का राजनीतिक माहौल अपने पक्ष में बनाए रखने के लिए हर हाल में निगमों में अपने मेयर बैठाने की फिराक में है।
पार्षद लेंगे शपथ, फिर मेयर, डिप्टी मेयर का चुनाव
अधिसूचना के अनुसार, 26 मई को संपन्न हुए निकाय चुनाव के परिणामों के बाद अब सरकार ने पंजाब नगर निगम (मेयर के कार्यालयों के लिए आरक्षण) नियम-2017 के तहत रोस्टर पॉइंट के आधार पर यह रिजर्वेशन तय किया है। स्थानीय निकाय विभाग के नियमों के मुताबिक, चुनावी प्रक्रिया के तहत सबसे पहले नव-निर्वाचित पार्षदों को आधिकारिक तौर पर पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी।
शपथ ग्रहण समारोह संपन्न होने के तुरंत बाद मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पदों के लिए चुनाव करवाया जाएगा, जिसके बाद ही पठानकोट को उसका नया मेयर मिलेगा।
वोट शेयर में कांग्रेस आगे: दिलचस्प बात यह है कि पिछले चुनाव में प्रचंड बहुमत हासिल करने वाली कांग्रेस इस बार महज 18 सीटें ही जीत सकी है और ‘आप’ को 10 वार्डों में कामयाबी मिली है। लेकिन वोट शेयर के मामले में कांग्रेस, भाजपा के मुकाबले आगे रही है। उसे 50 वार्डों में भाजपा से करीब 33 हजार से ज्यादा वोट पड़े हैं, जबकि भाजपा को कांग्रेस के मुकाबले 1600 कम वोट मिले हैं।
गठबंधन से बदलेगा गेम: यदि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) का गठबंधन धरातल पर उतरता है, तो कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक्क के नेतृत्व में यह आंकड़ा 29 सीटों (18 कांग्रेस + 10 आप+1 कैबिनेट मंत्री) पर पहुंच जाएगा, जो बहुमत के आंकड़े से दो ज्यादा है। इसी वजह से दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व में गठबंधन को लेकर पर्दे के पीछे गंभीर बातचीत शुरू हो गई है।








