जालंधर। जालंधर में भोगपुर गांव भटनूरा लुबाना का रहने वाला 29 वर्षीय अरविंदर सिंह इंग्लैंड जाने की कोशिश में जान गंवा बैठा है। वह पिछले सात साल से फ्रांस में रह रहा था और इंग्लैंड में बसने का सपना देख रहा था। इसी कोशिश में वह अन्य 80 लोगों के साथ नाव के जरिए समुद्र पार करने निकला था, लेकिन यह सफर उसकी जिंदगी का आखिरी सफर बन गया। ऑर्डर-डॉन संस्था के प्रबंधक राजीव चीमा ने कहा कि यह नाव ट्यूब के आकार की थी और समुद्र पार करने के दौरान लगभग 15 किलोमीटर आगे बढ़ने के बाद पलट गई।
77 लोगों की जान बची, अरविंद नहीं बच पाई
घटना के बाद राहत एवं बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर 77 लोगों की जान बचाई, लेकिन अरविंदर सिंह समेत दो अन्य विदेशी युवक लहरों की भेंट चढ़ गए। हादसे के कुछ दिन बाद अरविंदर का शव पेरिस से करीब 360 किलोमीटर दूर समुद्र तट पर मिला।
दोस्त के मोबाइल से मिला हादसे का पता
परिवार को घटना की जानकारी 2 अक्टूबर को मिली, जब कपूरथला के चौहाना गांव के एक युवक ने फोन कर बताया कि नाव पलट गई थी और अरविंदर लापता है। यह युवक भी उसी नाव में सवार था। उसने बताया कि सभी को बचा लिया गया, लेकिन अरविंदर का कुछ पता नहीं चला। उस समय से ही परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
वर्क परमिट पर गया था पुर्तगाल, फिर बदली योजना
अरविंदर के छोटे भाई अश्विंदर सिंह के अनुसार, वह 18 मई को वर्क परमिट वीजा पर पुर्तगाल गया था। वहां उसे कानूनी रूप से काम करना था और 5 सितंबर को उसका बायोमेट्रिक प्रोसेस भी पूरा हो गया था। लेकिन कुछ युवाओं के संपर्क में आने के बाद उसने इंग्लैंड जाने की योजना बनाई। पहले उसने ट्रक से यात्रा करने की कोशिश की, पर जब ट्रक ड्राइवर ने मना कर दिया, तो उसने नाव से जाने का निर्णय ले लिया।
परिजनों ने अरविंदर को कई बार समझाया कि वह ऐसा जोखिम न ले, लेकिन उसने उनकी बात नहीं मानी। 29 सितंबर को उसने आखिरी बार घर फोन किया था, पर इस दौरान नाव से जाने की बात नहीं बताई। दो दिन बाद ही परिवार को उसके डूबने की सूचना मिली। अब उसके निधन की खबर से गांव में शोक की लहर फैल गई है।
विदेश जाने की ललक बन रही जानलेवा
हाल के दिनों में पंजाब के कई नौजवान अवैध रास्तों से यूरोप या इंग्लैंड जाने की कोशिश में अपनी जान गंवा चुके हैं। अरविंदर सिंह की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक युवा गैरकानूनी रास्तों से विदेश पहुंचने के लिए अपनी जिंदगी खतरे में डालते रहेंगे। परिवार अब सरकार से शव को भारत लाने में मदद की गुहार लगा रहा है।








